डॉक्टरों ने कहा है, पेलेट गन का शिकार हुए पीड़ित की आँख की रोशनी वापस आने की केवल 1% संभावना है
‘द हिंदू’ में आशना बुटानी की रिपोर्ट के अनुसार, 19 वर्षीय साहिल लोचब के परिवार का कहना है कि डॉक्टरों ने उन्हें सूचित किया है कि उसकी दाहिनी आँख की रोशनी वापस आने की संभावना केवल 1% है. साहिल की आँख सोमवार (20 जुलाई 2026) को संसद की ओर निकाले जा रहे मार्च पर सुरक्षा बलों द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर पेलेट गन की फायरिंग से घायल हो गई थी. दरअसल आँख की पुतली को खासा नुकसान हुआ है. 21 जुलाई को एम्स के जयप्रकाश नारायण अपेक्स ट्रॉमा सेंटर में उसके शरीर से छर्रों को निकालने के लिए सर्जरी की गई थी.
‘ऑल्ट न्यूज़’ से बात करते हुए साहिल की माँ ज्योति ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने साहिल को एम्स दिल्ली में भर्ती कराया, तो वहाँ के डॉक्टरों ने "लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (एलएचएमसी) से रेफर किए जाने का कारण स्वीकार नहीं किया और मुझसे ऐसे कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए जिनमें एलएचएमसी से रेफर किए जाने का कारण ही दर्ज नहीं था." ‘ऑल्ट न्यूज़’ ने सोमवार को हुई पेलेट गन फायरिंग के फुटेज की जियोलोकेशन (स्थान) की भी पुष्टि की है. मानवाधिकार संगठनों ने ध्यान दिलाया है कि पेलेट (छर्रे) दागे जाने के बाद फैल जाते हैं और अंधाधुंध नुकसान पहुँचा सकते हैं.
इस बीच, 21 वर्षीय साक्षी, जो 20 जुलाई को पुलिस की कार्रवाई के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गई थी और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था, उसे अब वेंटिलेटर से हटा लिया गया है. साक्षी को सीपीआर देकर उसे अस्पताल पहुँचाने वाली सिद्धि नामक एक युवा कामकाजी महिला ने उस दिन के घटनाक्रम का विवरण ‘द वायर’ में साझा किया है, जिसमें अजनबियों की संवेदनशीलता और पुलिस की बेरुखी भी शामिल है.

