भारत का तेल भंडार केवल 10 दिनों के आयात के बराबर, जबकि जापान और दक्षिण कोरिया के पास 200 से अधिक दिनों का भंडार
‘काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर’ (सीईईडब्ल्यू) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) देश के शुद्ध कच्चे तेल आयात के केवल 9-10 दिनों के बराबर है, जो जापान और दक्षिण कोरिया (200 से ज्यादा दिन) जैसे देशों से बेहद कम है. भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% से अधिक हिस्सा केवल छह देशों (मुख्य रूप से रूस और पश्चिम एशिया) से आयात करता है, जिससे वैश्विक आपूर्ति संकट के समय देश के लिए जोखिम बढ़ जाता है.
सीईईडब्ल्यू के फेलो हेमंत माल्या के अनुसार, कच्चे तेल, गैस या समुद्री मार्गों में मामूली रुकावट भी रसोई खर्च, ईंधन की कीमतों, उर्वरक सब्सिडी और महंगाई को सीधे प्रभावित कर सकती है.
‘पीटीआई’ के अनुसार, भारत अपनी आधी गैस एलएनजी के रूप में आयात करता है, लेकिन इसके पास कोई रणनीतिक गैस स्टोरेज नहीं है. साथ ही, स्टील निर्माण के लिए ऑस्ट्रेलिया के कोकिंग कोल और इंडोनेशिया की निर्यात नीतियों पर निर्भरता बनी हुई है. घटती गुणवत्ता और बढ़ती उत्पादन लागत के कारण अब रिन्यूएबल ऊर्जा की तुलना में कोयला बिजली महंगी होती जा रही है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वच्छ ऊर्जा (क्लीन एनर्जी) जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम कर सकती है, लेकिन यह क्रिटिकल मिनरल्स और नई तकनीकों पर एक अलग तरह की निर्भरता पैदा करेगी. इसे घरेलू विनिर्माण, रीसाइक्लिंग और मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों से सुधारा जा सकता है. भारत को अब जीवाश्म ईंधन से आगे बढ़कर गैस उपयोग को बेहतर करने, ईवी अपनाने, उद्योगों के विद्युतीकरण और मजबूत 'ग्रीन सप्लाई चेन' बनाने जैसे बदलावों पर ध्यान देना होगा.

