अमेरिकी सीनेट ने रूस प्रतिबंध विधेयक पारित किया; रूसी तेल के कारण भारत पर 100% शुल्क लगने का खतरा

अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार को रूस पर प्रतिबंध लगाने संबंधी एक विधेयक पारित किया, जो अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से भारी मात्रा में ऊर्जा (तेल) खरीदना जारी रखने वाले देशों पर 100%  तक का शुल्क (टैरिफ) लगाने का अधिकार देता है. इस कानून से प्रभावित होने वाले संभावित देशों में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान प्रमुख रूप से शामिल हैं.

‘एचटी न्यूज़ डेस्क’ के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में बदलाव के कारण भारत रूसी कच्चे तेल का दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा आयातक (चीन के बाद) बन चुका है. रियायती दरों पर मिल रहे रूसी तेल ने भारतीय रिफाइनरियों को लागत नियंत्रित करने और देश में ईंधन की स्थिर आपूर्ति बनाए रखने में मदद की. बाद में पश्चिम एशिया में संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर भारत ने एक सुरक्षित विकल्प के रूप में रूस से तेल आयात को और बढ़ा दिया. जून 2026 में भारत का रूसी तेल आयात 34% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था.

दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव पहले भी देखा गया है. अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 25% का अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, जिससे कुछ निर्यातों पर कुल शुल्क 50% तक पहुँच गया था.  हालाँकि वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान छूट दी गई थी, लेकिन यह नया विधेयक एक बार फिर तनाव बढ़ा सकता है.

यह विधेयक कानून बनने के लिए विधायी प्रक्रिया के अगले चरणों से गुजरेगा. सांसदों द्वारा सीमित ऊर्जा आयात वाले देशों के लिए कुछ छूटों पर भी चर्चा की जा रही है. अंतिम कानून और इसमें दी जाने वाली छूट ही भारत पर इसके वास्तविक प्रभाव का निर्धारण करेगी, जबकि भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि उसकी ऊर्जा खरीद पूरी तरह से राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा द्वारा निर्देशित है.

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