दिल्ली एसआईआर: दो बूथों के 100 से अधिक मतदाताओं को गलत तरीके से अनुपस्थित, स्थानांतरित या मृत दर्शाया
सात दिनों के दौरान 258 घरों को कवर करने वाले एक जन-ऑडिट में पाया गया कि दिल्ली के ओखला निर्वाचन क्षेत्र के दो मतदान बूथों के कम से कम 100 मतदाताओं को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान गलत तरीके से 'अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट' (एएसडीडी) के रूप में वर्गीकृत किया गया था. ये मतदाता, जिन्होंने कहा कि दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची से उनके नाम गलत तरीके से गायब हैं, रविवार (18 अक्टूबर, 2026) को राष्ट्रीय राजधानी के बटला हाउस इलाके में आयोजित 'जन सुनवाई' (सार्वजनिक सुनवाई) में पहुंचे.
सुरुचि कुमारी की रिपोर्ट के अनुसार, एसआईआर गणना चरण के बाद प्रकाशित ड्राफ्ट सूची में ओखला में 1.85 लाख से अधिक मतदाता थे, जिनमें से 67,000 से अधिक नामों को नोटिस सूची में रखा गया था और लगभग 1.6 लाख नाम एएसडीडी सूची में दिखाई दिए. इस निर्वाचन क्षेत्र में नाम हटाए जाने (डिलीशन) की दर दूसरी सबसे अधिक देखी गई.
दशकों से रह रहे निवासी प्रभावित
सुनवाई में पहुंचने वालों में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर फैयाज अहमद (74) भी शामिल थे. पांच दशकों से अधिक समय से एक ही पते पर रहने के बावजूद, 31 अगस्त को प्रकाशित एएसडीडी सूची में अहमद को "लापता/अनुपस्थित" के रूप में चिह्नित किया गया था, जबकि उनकी पत्नी अंजुम आरा (62) को "स्थायी रूप से स्थानांतरित" के रूप में सूचीबद्ध किया गया था.
"क्या किसी एक व्यक्ति या संस्थान के पास किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची से इस तरह हटाने का अधिकार होना चाहिए? मैंने 1970 के दशक से लगभग हर चुनाव में वोट दिया है," अहमद ने पूछा.
उनके बेटे बाबू सरदार खान ने कहा कि उन्होंने अपने माता-पिता दोनों के विधिवत भरे हुए गणना फॉर्म इलाके के बूथ-स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) को जमा कर दिए थे. हालांकि, ड्राफ्ट रोल में सिर्फ उनका अपना नाम ही आया.
नईमुद्दीन (48), जिन्होंने कहा कि वे 30 साल से एक ही पते पर रह रहे हैं, को भी इसी तरह "स्थायी रूप से स्थानांतरित" के रूप में चिह्नित किया गया था. उन्होंने कहा कि वे बीएलओ के पास गए थे, जिन्होंने उनकी तस्वीरें ली थीं और एक फॉर्म पर उनके हस्ताक्षर लिए थे.
आक्रोशित होकर उन्होंने 1990 के दशक का अपना ड्राइविंग लाइसेंस और एक हथियार लाइसेंस दिखाया, जिसके लिए उन्होंने कहा कि व्यापक दस्तावेजों और सत्यापन की आवश्यकता पड़ी थी. पूर्व सरकारी सलाहकार नईमुद्दीन ने कहा, "ऐसा कैसे हो सकता है कि अब मैं एक नए मतदाता के रूप में पंजीकरण करूं और अपने पिछले सभी वोटिंग रिकॉर्ड मिटा दूं? और चुनाव आयोग का कोई भी व्यक्ति मुझे यह क्यों नहीं बता रहा है, बल्कि सामाजिक कार्यकर्ता बता रहे हैं?"
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा 20 सितंबर से हर सप्ताहांत सभी मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिसका घोषित उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि "कोई भी पात्र मतदाता छूटना नहीं चाहिए". हालांकि, 'द हिंदू' से बात करने वाले करीब 20 लोगों ने कहा कि वे विशेष शिविरों से अनजान थे.
'नया नामांकन ही एकमात्र विकल्प'
तनवीर अनवर ने बताया कि जब वे गणना फॉर्म लेने गए, तो बीएलओ ने उनसे कहा कि उनके भाई का फॉर्म उपलब्ध नहीं है और उनका नाम मतदाता सूची में नहीं है. उन्हें बताया गया कि उनके भाई का नाम संशोधन से पहले ही हटा दिया गया था. हालांकि, मोहम्मद फरीद अनवर का नाम एएसडीडी सूची में दिखाई दिया, जिससे संकेत मिलता है कि उनके फॉर्म को "अप्राप्य" के रूप में चिह्नित किया गया था.
ओखला गांव के निवासी रवि (37) का भी एक अजीब मामला सामने आया. उनकी पत्नी अनीता को सुनवाई के दौरान वोटर आईडी कार्ड पर उल्लिखित ईपीआईसी (एपिक) आईडी नंबर के जरिए पता चला कि उन्हें 'मृत' दिखाया गया है. हालांकि, ड्राफ्ट रोल में एक अलग एपिक नंबर के जरिए उनका रिकॉर्ड मौजूद था। उन्होंने कहा, "यह वही एपिक कार्ड है जो मुझे 2023 में जारी किया गया था, और मुझे कैसे पता चलेगा कि उसी पते पर मेरा एपिक नंबर बदल दिया गया है? मेरे पास अन्य एपिक कार्ड नहीं है."

