बंगाल बीजेपी अध्यक्ष ने राज्य में नए सिरे से एसआईआर कराने की मांग की; बोले-बंगाल में ठीक से नहीं हुआ
भले विश्वास न हो, मगर यह सच है कि पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने शनिवार (17 अक्टूबर, 2026) को राज्य में मतदाता सूची के एक नए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की मांग की. खास बात यह है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने की मांग को लेकर देश भर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच यह बयान आया है.
‘द हिंदू’ में शिव सहाय सिंह की रिपोर्ट के अनुसार भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान व्यवधान और हिंसा हुई थी. उन्होंने कहा, "यहाँ एक बार फिर एसआईआर कराने की आवश्यकता है, क्योंकि एसआईआर यहाँ ठीक से नहीं किया गया था. कागजात छीन लिए गए और उनमें आग लगा दी गई. हमारी विधायक अग्निमित्रा पॉल के वाहन से कागजात निकालकर पुलिस की मौजूदगी में आग के हवाले कर दिए गए. बीडीओ और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर हमले किए गए और रास्ते जाम किए गए."
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले, अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 तक एसआईआर प्रक्रिया आयोजित की गई थी. इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए थे, जो मतदाता सूची संशोधन शुरू होने से पहले राज्य के कुल मतदाताओं का लगभग 13% था. भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष स्थापित एसआईआर ट्रिब्यूनलों के सामने लगभग 38 लाख मतदाताओं का भविष्य अभी भी अधर में लटका हुआ है.
एक बंगाली न्यूज़ चैनल 'एबीपी आनंद' से बात करते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोग ज्ञानेश कुमार की "वीर-पूजा" (हीरो-वर्शिप) करते हैं और ऐसी मांगें उठ रही हैं कि देश को उन्हें पद्म पुरस्कारों से सम्मानित करना चाहिए.
कॉकचरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शनों के बारे में बात करते हुए, बीजेपी नेता ने कहा कि यह आंदोलन राजनीतिक रूप से अप्रासंगिक और मतदाताओं द्वारा नकारे गए तत्वों द्वारा चलाया जा रहा है तथा इसे जनसमर्थन प्राप्त नहीं है.

