ब्रिटेन की अदालत ने नीरव मोदी को ऋण वसूली मामले में 1.1 करोड़ डॉलर से अधिक भुगतान करने का आदेश दिया
लंदन के उच्च न्यायालय ने भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी को पर्सनल लोन गारंटी मामले में बैंक ऑफ इंडिया को ब्याज सहित 1.15 करोड़ अमरीकी डॉलर (100 करोड़ रुपये से ज्यादा) चुकाने का आदेश दिया है. जस्टिस साइमन टिंकलर ने नीरव मोदी की उन दलीलों को खारिज कर दिया, जिसमें उसने दुबई स्थित अपनी सहयोगी कंपनी 'फायरस्टार डायमंड एफजेडई' के ऋण से जुड़ी व्यक्तिगत गारंटी को अमान्य बताया था. अदालत ने स्पष्ट किया कि यह विशुद्ध रूप से एक वाणिज्यिक ऋण वसूली का मामला है, जिसका मुख्य पीएनबी (पंजाब नेशनल बैंक) धोखाधड़ी मामले से सीधा संबंध नहीं है.
‘पीटीआई’ के अनुसार, इस मामले में नीरव मोदी ने खुद पैरवी की थी. उसने गंभीर दृष्टि हानि, डिप्रेशन और जेल ट्रांसफर (थेम्ससाइड से पेंटनविले) के दौरान केस के कागजात न मिलने का हवाला देकर सुनवाई टालने की कोशिश की थी. कोर्ट ने जेल प्रशासन की इस लापरवाही को दर्ज किया, जिसके लिए जेल गवर्नर ने माफी भी मांगी.
55 वर्षीय नीरव मोदी भारत में सीबीआई, ईडी और गवाहों से छेड़छाड़ के तीन आपराधिक मामलों में वांछित है. अप्रैल 2021 में प्रत्यर्पण की मंजूरी मिलने के बाद से वह ब्रिटेन की जेल में बंद है और उसकी कई जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं. मार्च में प्रत्यर्पण रोकने का अंतिम कानूनी प्रयास हारने के बाद, उसने अब राहत के लिए मानवाधिकारों के यूरोपीय न्यायालय का रुख किया है.

