मध्य प्रदेश में 1.56 लाख से अधिक ‘साल’ के पेड़ काटने की मंजूरी
‘डाउन टू अर्थ’ की रिपोर्ट मुताबिक, मध्य प्रदेश के डिंडोरी और अनूपपुर जिलों के अमरकंटक क्षेत्र में साल बोरर कीट से प्रभावित 1,56,319 पेड़ों को काटने की अनुमति मिल गई है. वन विभाग ने कीट के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए इन पेड़ों की कटाई की अनुमति मांगी थी.
डिंडोरी वन विभाग के उप-मंडल अधिकारी सुरेंद्र जाटव ने बताया कि केंद्र सरकार ने डिंडोरी जिले में 1,46,784 साल के पेड़ों को काटने की मंजूरी दी है. यह अनुमति 17 सितंबर को मिली. वहीं अनूपपुर जिले के अमरकंटक क्षेत्र में 9,535 साल के पेड़ काटे जाएंगे. अनूपपुर के प्रभागीय वन अधिकारी डेविड चेनाप के अनुसार, यहां पेड़ों की कटाई अक्टूबर से शुरू होने की संभावना है. 17 सितंबर को इस संबंध में आगे की रणनीति तय करने के लिए एक कार्यशाला भी आयोजित की गई.
साल बोरर के प्रकोप को रोकने के लिए वन विभाग ट्रैप ट्री पद्धति के साथ-साथ स्थानीय लोगों से कीट खरीदने की योजना भी चला रहा है. विभाग प्रत्येक साल बोरर के लिए दो रुपये दे रहा है. डिंडोरी वन मंडल में अब तक 19,25,118 कीट खरीदे जा चुके हैं, जिन पर करीब 38.5 लाख रुपये खर्च हुए हैं. जंगलों के आसपास रहने वाले ग्रामीण और आदिवासी इन कीटों को एकत्र कर वन विभाग के संग्रह केंद्रों तक पहुंचा रहे हैं.
डिंडोरी का करंजिया रेंज साल बोरर के प्रकोप से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र है. दिसंबर 2025 में यहां बड़े पैमाने पर पेड़ों के नीचे बुरादा जमा मिला था, जो पेड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचने का संकेत था. वन विभाग की टीमें प्रभावित पेड़ों की पहचान कर उन्हें काटने के लिए चिह्नित कर रही थीं.
डिंडोरी में साल बोरर से प्रभावित पेड़ों में से करीब 90 प्रतिशत करंजिया रेंज में बताए गए हैं. इसी कारण सबसे ज्यादा पेड़ों की कटाई भी इसी क्षेत्र में होने की संभावना है. वन क्षेत्र में कीट का प्रकोप लगातार बढ़ने के बाद अब प्रभावित पेड़ों को हटाने और संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू की जा रही है.

