कांवड़ यात्रा के दौरान 18 कथित घृणा घटनाएं, ज्यादातर मामलों में मुसलमान निशाने पर

‘मकतूब मीडिया’ में प्रकाशित खबर के मुताबिक, एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स यानी एपीसीआर ने 2026 की कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, दिल्ली और बिहार में हिंसा, भेदभाव और कथित अश्लील आचरण से जुड़ी कम से कम 18 घटनाओं का दस्तावेजीकरण किया. इनमें नौ मामले शारीरिक या जबरन कार्रवाई, चार मामले बहिष्कार या भेदभाव और पांच मामले कथित अश्लील आचरण से जुड़े बताए गए हैं.

हापुड़ में 24 वर्षीय ट्रक चालक अजीम अली को ब्रजघाट टोल प्लाजा के पास एक खड़े ऑटो से टक्कर के बाद कांवड़ियों ने कथित तौर पर बाहर खींचकर पीटा. कुछ दिन बाद उनकी मौत हो गई. गाजियाबाद में इमरान नामक युवक पर कांवड़ को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाकर कथित तौर पर मारपीट की गई और उसे करीब 20 मिनट तक रोका गया. बाद में पुलिस ने कहा कि कांवड़ को नुकसान पहुंचने की बात सही नहीं थी. रामपुर में एक मुस्लिम मोटरसाइकिल सवार को कथित तौर पर कांवड़ियों के पैर छूकर माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया.

कांवड़ियों के व्यवहार की आलोचना करने पर ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद राशिदी के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई. बहेड़ी में मुस्लिम स्वामित्व वाली चिकन बिरयानी की दुकान को कथित तौर पर ध्वस्त किया गया और दुकानदार मोहम्मद सलमान को हिरासत में लिया गया. मुजफ्फरनगर में होटल और ढाबों को मांसाहारी भोजन परोसने से रोकने के साथ कुछ जगहों पर प्याज और लहसुन के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाए गए.

उत्तर प्रदेश, हापुड़, दिल्ली, मुजफ्फरनगर और शामली में कांवड़ मार्गों के आसपास मांस, मछली और अंडे की दुकानों को बंद कराया गया. बरेली में उर्स-ए-आला हजरत की तारीख बदली गई और आयोजन में केवल शाकाहारी भोजन रखने का निर्देश दिया गया. 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कांवड़ मार्ग के भोजनालयों को मालिकों और कर्मचारियों के नाम प्रदर्शित करने के निर्देश पर रोक लगा दी थी.

एपीसीआर ने कांवड़ जुलूसों के दौरान कथित अश्लील इशारों, नृत्य, तेज संगीत और देर रात तक चलने वाले जुलूसों से जुड़ी पांच घटनाओं का भी उल्लेख किया. संगठन ने इन घटनाओं को सार्वजनिक स्थानों पर समान कानून-व्यवस्था और नागरिक अधिकारों से जुड़े सवालों के संदर्भ में दर्ज किया है.

Previous
Previous

मुंबई लंदन से बेहतर, गोरखपुर स्पेन से आगे: हकीकत छिपाने के लिए राष्ट्रवाद का इस्तेमाल

Next
Next

मध्य प्रदेश में 1.56 लाख से अधिक ‘साल’ के पेड़ काटने की मंजूरी