भारतीय कंपनी, किडनी ट्रांसप्लांट और 160 अरब डॉलर की खदान: ओसीसीआरपी की जांच में क्या सामने आया
‘ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट’ यानी ओसीसीआरपी के पत्रकार माइकल ई. मिलर और कार्मेल एन. पिलोटी की जांच प्रशांत महासागर के द्वीपीय क्षेत्र बोगेनविले में स्थित पंगुना सोना-तांबा खदान को लेकर गंभीर सवाल उठाती है. रिपोर्ट के मुताबिक, बोगेनविले के राष्ट्रपति इश्माएल टोरोआमा ने आधिकारिक चयन प्रक्रिया और अपनी सरकार की बहुसंख्यक हिस्सेदारी वाली खनन कंपनी बोगेनविले कॉपर लिमिटेड यानी बीसीएल की चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए भारतीय कंपनी लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड यानी लॉयड्स को खदान के पुनर्विकास का साझेदार चुना. इसी दौरान लॉयड्स के प्रबंध निदेशक बालासुब्रमण्यम प्रभाकरन द्वारा राष्ट्रपति की पत्नी के किडनी ट्रांसप्लांट का खर्च उठाए जाने की बात भी सामने आई है.
160 अरब डॉलर की खदान और आजादी का सपना
पंगुना खदान बोगेनविले की सबसे बड़ी आर्थिक उम्मीद मानी जाती है. सोना और तांबा से भरपूर इस खदान की अनुमानित कीमत करीब 160 अरब डॉलर है. बोगेनविले 2019 में भारी बहुमत से पापुआ न्यू गिनी से स्वतंत्र होने के पक्ष में मतदान कर चुका है और वहां की संसद जल्द ही उसकी संप्रभुता पर विचार करने वाली है. अगर स्वतंत्रता मिलती है तो 2030 तक बोगेनविले दुनिया का नया देश बन सकता है.
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह सपना काफी हद तक पंगुना खदान की सफल शुरुआत पर निर्भर है. यही कारण है कि बीसीएल ने करीब 10 महीने तक दुनिया की बड़ी खनन कंपनियों में से एक सक्षम अंतरराष्ट्रीय साझेदार तलाशने की प्रक्रिया चलाई. चीन की बड़ी कंपनियां सीएमओसी और ज़ीजिन माइनिंग जैसी कंपनियों ने भी रुचि दिखाई.
इसके बावजूद नवंबर 2025 में राष्ट्रपति टोरोआमा ने अचानक लॉयड्स के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर दिए. रिपोर्ट के अनुसार, लॉयड्स के पास बड़े पैमाने पर सोना और तांबा खनन का अनुभव नहीं था और उसकी मुख्य विशेषज्ञता लौह अयस्क खनन में थी.
बीसीएल की चेतावनी और आधिकारिक प्रक्रिया से अलग रास्ता
बीसीएल ने राष्ट्रपति को चेतावनी दी थी कि लॉयड्स की तकनीकी और वित्तीय क्षमता अन्य दावेदारों की तुलना में कमजोर है. समझौते से 10 दिन पहले बीसीएल के तत्कालीन अध्यक्ष मेलकियर टोगोलो ने टोरोआमा को पत्र लिखकर कहा था कि गलत साझेदार चुनने से परियोजना लंबे समय तक ठप रह सकती है और पर्यावरण तथा समाज पर गंभीर असर पड़ सकता है.
बीसीएल के दस्तावेजों में लॉयड्स की तुलना पांच अन्य कंपनियों से की गई थी और उसे तकनीकी तथा वित्तीय क्षमता में कमजोर बताया गया था. बाद में दिसंबर 2025 में बीसीएल ने चीनी कंपनी सीएमओसी को सबसे उपयुक्त विकल्प बताया, लेकिन जनवरी 2026 में राष्ट्रपति ने इसकी सलाह भी नहीं मानी और लॉयड्स को आधिकारिक साझेदार घोषित कर दिया.
जांच में यह भी सामने आया कि लॉयड्स ने अप्रैल 2025 में बीसीएल के साथ गोपनीयता समझौता किया था, जिससे उसे पंगुना खदान की संवेदनशील जानकारी मिली. लेकिन कुछ ही दिनों बाद कंपनी ने बीसीएल से संवाद लगभग बंद कर दिया और औपचारिक रूप से अपनी रुचि का आवेदन भी नहीं दिया. बीसीएल ने बाद में शिकायत की कि कंपनी सरकार के अधिकारियों से सीधे संपर्क कर आधिकारिक चयन प्रक्रिया के बाहर काम कर रही है.
राष्ट्रपति की पत्नी का किडनी ट्रांसप्लांट
इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू राष्ट्रपति की पत्नी बेट्टी टोरोआमा के इलाज से जुड़ा है. राष्ट्रपति ने ओसीसीआरपी को बताया कि अक्टूबर 2025 में लॉयड्स के प्रबंध निदेशक बालासुब्रमण्यम प्रभाकरन ने उनकी पत्नी को भारत लाकर किडनी ट्रांसप्लांट कराने की पेशकश की.
राष्ट्रपति के अनुसार, उनकी पत्नी गंभीर किडनी बीमारी से जूझ रही थीं और उन्हें लगा था कि उनके पास बहुत कम समय बचा है. उनकी बेटी ने किडनी दान करने की पेशकश की. टोरोआमा ने कहा कि उन्होंने प्रभाकरन की तीसरी पेशकश के बाद इलाज की मदद स्वीकार की और यह स्पष्ट किया कि इसका पंगुना खदान के समझौते से कोई संबंध नहीं है.
हालांकि, कोयंबटूर के किडनी सेंटर के एक प्रशासक ने ओसीसीआरपी को बताया कि ट्रांसप्लांट और बाद की चिकित्सा यात्रा का खर्च लॉयड्स ने उठाया. ऑपरेशन 5 दिसंबर 2025 को हुआ, यानी नवंबर में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के कुछ सप्ताह बाद.
भारत यात्रा, अस्पताल और समझौता
राष्ट्रपति टोरोआमा भारत आए और लॉयड्स की सुविधाओं का दौरा किया. इसके बाद बोगेनविले के कुछ अधिकारी और राष्ट्रपति के करीबी लोग भी कंपनी के खर्च पर भारत की यात्रा पर गए. रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल के लौटने से पहले ही 20 नवंबर 2025 को राष्ट्रपति ने लॉयड्स के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर दिए.
समझौते में लॉयड्स ने अरोआ शहर में एक आधुनिक अस्पताल बनाने, पर्यटन, तकनीकी कॉलेज, विशेष आर्थिक क्षेत्र, बैंक और अन्य परियोजनाओं में मदद का वादा किया. कंपनी ने अस्पताल को सद्भावना परियोजना बताया. जनवरी 2026 में राष्ट्रपति ने लॉयड्स को खदान का आधिकारिक साझेदार घोषित किया और अगले दिन अस्पताल निर्माण का शिलान्यास हुआ.
बीसीएल को हटाने के लिए कानून में बदलाव
जून 2026 में बोगेनविले की संसद ने खनन कानून में संशोधन कर पंगुना खदान के लिए एक विशेष और असाधारण प्रक्रिया बनाई. इसके अगले दिन सरकारी कंपनी बोगेनविले मिनरल्स लिमिटेड को खनन लाइसेंस दे दिया गया और बीसीएल प्रभावी रूप से परियोजना से बाहर हो गई.
अब बोगेनविले मिनरल्स लिमिटेड लॉयड्स के साथ व्यवहार्यता अध्ययन और शुरुआती काम कर रही है. राष्ट्रपति का कहना है कि इससे परियोजना तेजी से आगे बढ़ेगी, जबकि बीसीएल पुराने पर्यावरणीय और सामाजिक मुद्दों पर ध्यान दे सकेगी.
पुराना संघर्ष और नए हिंसा का डर
पंगुना खदान बोगेनविले के इतिहास का बेहद संवेदनशील हिस्सा है. 1980 के दशक में मुनाफे के बंटवारे और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा बढ़ा, जिसने 1988 में विद्रोह और फिर लंबे गृहयुद्ध का रूप ले लिया. 1989 में खदान बंद हुई और संघर्ष में करीब 15,000 लोगों की मौत हुई.
आज भी कई स्थानीय भूमि मालिक खदान को फिर शुरू करने के तरीके का विरोध कर रहे हैं. उनका आरोप है कि राष्ट्रपति ने पर्याप्त सार्वजनिक और स्थानीय परामर्श के बिना लॉयड्स के साथ समझौता किया. कुछ लोगों को पर्यावरण, पवित्र स्थलों और पारंपरिक जमीन के नुकसान की चिंता है. विरोध के बीच तनाव बढ़ा है और पूर्व विद्रोहियों को खदान की सुरक्षा में लगाए जाने की बात भी सामने आई है.
स्थानीय भूमि मालिकों का कहना है कि पंगुना के पुराने खनन मॉडल ने पहले ही उनकी जमीन और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया था. उन्हें आशंका है कि नई परियोजना में भी उनकी सहमति, अधिकार और मुआवजे को पर्याप्त महत्व नहीं मिलेगा. कुछ लोगों ने चेतावनी दी है कि असंतोष बढ़ने पर क्षेत्र में फिर तनाव और हिंसा की स्थिति पैदा हो सकती है.
बोगेनविले के भविष्य पर बड़ा सवाल
ओसीसीआरपी की जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिरकार एक ऐसी कंपनी को इतना बड़ा अवसर कैसे मिला, जिसे आधिकारिक चयन प्रक्रिया में मजबूत दावेदार नहीं माना गया था. बीसीएल की चेतावनियों के बावजूद लॉयड्स को चुना गया, कंपनी के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच सीधे संपर्क हुए, भारत यात्राएं हुईं और इसी दौरान राष्ट्रपति की पत्नी के किडनी ट्रांसप्लांट का खर्च कंपनी द्वारा उठाए जाने की जानकारी सामने आई.
राष्ट्रपति टोरोआमा इलाज और खदान सौदे के बीच किसी संबंध से इनकार करते हैं. उनका कहना है कि उनकी पत्नी का इलाज पूरी तरह व्यक्तिगत मामला था और इसका पंगुना समझौते पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. दूसरी ओर, लॉयड्स और उसके प्रबंध निदेशक ने ओसीसीआरपी के सवालों का जवाब नहीं दिया.
यह मामला केवल एक खनन सौदे तक सीमित नहीं है. पंगुना खदान बोगेनविले की अर्थव्यवस्था, उसकी संभावित आजादी और हजारों लोगों के भविष्य से जुड़ी है. 160 अरब डॉलर की इस परियोजना में गलत फैसला आर्थिक संकट, पर्यावरणीय नुकसान और पुराने संघर्षों को फिर जगा सकता है. इसलिए ओसीसीआरपी की जांच ने निजी मदद, सरकारी फैसलों, कॉरपोरेट हितों और सार्वजनिक जवाबदेही के बीच ऐसे गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब बोगेनविले के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा.

