हरियाणा में 16.4% और आंध्र प्रदेश में 10.8% मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटे
‘स्क्रोल’ रिपोर्ट के मुताबिक, निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत शुक्रवार को हरियाणा और आंध्र प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी गई. ड्राफ्ट सूची के अनुसार हरियाणा में 16.4% और आंध्र प्रदेश में 10.8% मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं.
आंध्र प्रदेश में करीब 45 लाख और हरियाणा में 33.8 लाख नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए. दोनों राज्यों में गणना की प्रक्रिया 24 जुलाई को पूरी हुई थी.
हरियाणा में 24.1 लाख मतदाताओं (11.6%) के नाम इसलिए हटाए गए क्योंकि वे स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर चले गए थे या पुनरीक्षण के दौरान अनुपस्थित पाए गए. 7.6 लाख मतदाताओं (3.7%) के नाम मृत घोषित होने के आधार पर हटाए गए, जबकि 2 लाख (0.9%) नाम डुप्लीकेट होने के कारण सूची से बाहर किए गए.
आंध्र प्रदेश में 22.3 लाख मतदाताओं (5.3%) के नाम स्थायी रूप से स्थानांतरित होने या सत्यापन के दौरान अनुपस्थित रहने के कारण हटाए गए. 15.2 लाख (3.6%) नाम मृत मतदाताओं के रूप में दर्ज होने के कारण हटे, जबकि 7.3 लाख (1.7%) नाम डुप्लीकेट होने के कारण सूची से बाहर किए गए.
दोनों राज्यों में जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं, वे 31 जुलाई से 30 अगस्त के बीच दावा और आपत्ति दर्ज करा सकेंगे. इन दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी.
ड्राफ्ट सूची से नाम हटाए जाने के मामले में हरियाणा देश में तीसरे स्थान पर है. इससे पहले अरुणाचल प्रदेश में 19.09% और उत्तर प्रदेश में 18.7% मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं. उत्तर प्रदेश में यह प्रक्रिया अप्रैल में पूरी हुई थी.
हरियाणा और आंध्र प्रदेश SIR के तीसरे चरण का हिस्सा हैं. इस चरण में 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण किया जा रहा है.
एसआईआर प्रक्रिया की शुरुआत 2025 में बिहार से हुई थी. इसके बाद 2025 के उत्तरार्ध और 2026 की पहली छमाही में इसे दूसरे चरण के तहत 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक बढ़ाया गया. प्रक्रिया शुरू होने के बाद से विपक्षी दलों और कई नागरिक संगठनों ने आशंका जताई है कि इसके कारण वास्तविक मतदाताओं के नाम भी सूची से हट सकते हैं और इससे चुनावी परिणाम प्रभावित हो सकते हैं.
इससे पहले जुलाई में ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 22 लाख से अधिक नाम हटाए गए थे. यह इन चार राज्यों के कुल मतदाताओं का लगभग 6.1% था.
मई में सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया की वैधता को बरकरार रखा था. हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया था कि इस प्रक्रिया के आधार पर निर्वाचन आयोग किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता का फैसला नहीं कर सकता.

