ओडिशा एसआईआर: अंतिम मतदाता सूची से 17.6 लाख से ज्यादा नाम हटे
‘स्क्रोल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ओडिशा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद जारी अंतिम सूची से 17.6 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं. राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या एसआईआर शुरू होने से पहले 3.33 करोड़ थी, जो अब घटकर 3.16 करोड़ रह गई है. यानी मतदाता संख्या में करीब 5.2 फीसदी की कमी हुई है.
ओडिशा उन 19 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शामिल है, जहां एसआईआर का तीसरा चरण चल रहा है. राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया 30 मई से शुरू हुई थी.
20 लाख से अधिक नाम प्रारंभिक सूची से बाहर
मुख्य निर्वाचन अधिकारी आर.एस. गोपालन के मुताबिक, एसआईआर के दौरान करीब 3.1 करोड़ मतदाताओं से गणना फॉर्म प्राप्त हुए. यह राज्य के कुल मतदाताओं का 93.9 फीसदी था.
जुलाई में जारी प्रारंभिक मतदाता सूची में उन 20 लाख से अधिक लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए थे, जिनके गणना फॉर्म निर्वाचन अधिकारियों को नहीं मिले थे. इनमें करीब 8.3 लाख मतदाताओं को मृत, 2 लाख को अनुपस्थित, 8.1 लाख को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित और 1.6 लाख को डुप्लीकेट प्रविष्टि के रूप में दर्ज किया गया था.
इसके बाद मतदाताओं को अपने नाम को लेकर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया गया. 5 जुलाई से 19 अगस्त के बीच करीब 2.5 लाख दावे और आपत्तियां प्राप्त हुईं और उनका निपटारा किया गया.
दावे-आपत्तियों के बाद भी हजारों नाम हटे
सुनवाई के बाद 24 हजार से अधिक मतदाता अंतिम सूची में शामिल किए जाने के लिए अयोग्य पाए गए. इसके अलावा करीब 20,700 नाम उन आवेदनों के आधार पर हटाए गए, जिनमें किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई गई थी या उसे हटाने की मांग की गई थी.
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, दावों, आपत्तियों और अन्य आवेदनों के निपटारे के बाद 44,770 और नाम हटाए गए. वहीं, इसी प्रक्रिया के बाद 2.9 लाख से अधिक नए मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में जोड़े गए. इससे प्रारंभिक सूची की तुलना में करीब 2.4 लाख नामों की शुद्ध बढ़ोतरी हुई.
एसआईआर को लेकर पहले से उठते रहे हैं सवाल
2025 में बिहार से एसआईआर की शुरुआत हुई थी. इसके बाद 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में इसे 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक बढ़ाया गया. इस प्रक्रिया को लेकर यह चिंता जताई जाती रही है कि पुनरीक्षण के दौरान वास्तविक मतदाताओं के नाम भी सूची से बाहर हो सकते हैं और इसका चुनावी परिणामों पर असर पड़ सकता है.
मई में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर की वैधता बरकरार रखी थी. हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया था कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण करने का अर्थ यह नहीं है कि निर्वाचन आयोग किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता तय कर सकता है.

