मध्य प्रदेश की जहरीली शराब त्रासदी : 20 रुपये के अंतर ने ली 22 जानें, 112 की हालत बिगड़ी
मध्य प्रदेश के सागर जिले में हुई जहरीली शराब त्रासदी में 22 लोगों की जान सिर्फ 20 रुपये के मामूली अंतर के कारण चली गई. जहरीली शराब के सेवन से 112 लोगों की तबीयत बिगड़ी. बंडा थाना क्षेत्र के तीन गांवों के ये शराब के लती लोग एक नकली शराब ब्रांड की लत के कारण अपनी जान देकर भारी कीमत चुका बैठे. बंडा थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, यह नकली शराब सिर्फ इसलिए बेची गई क्योंकि यह 20 रुपये सस्ती थी.
रबींद्रनाथ चौधरी के अनुसार, एक स्थानीय निवासी अनूप सिंह लोधी ने अपनी शिकायत में बताया कि उनके गांव के आठ लोग अवैध शराब के कारोबार में लिप्त थे. वह 4 सितंबर को अपने भतीजे राजेंद्र सिंह लोधी के साथ इनमें से एक व्यापारी की दुकान पर गए थे. व्यापारी ने उन्हें बताया कि एक लाइसेंस प्राप्त विक्रेता ने आपूर्ति नेटवर्क के माध्यम से एक नकली ब्रांड मंगवाया था, जो प्रति क्वार्टर (चौथाई बोतल) 20 रुपये सस्ता था.
व्यापारी ने उन्हें यह समझाने की कोशिश की कि इस नकली ब्रांड का फॉर्मूला मूल ब्रांड के जैसा ही है, लेकिन 70 रुपये के मूल ब्रांड की तुलना में यह 20 रुपये सस्ता (50 रुपये का) है. आरोप है कि राजेंद्र सिंह लोधी ने वह नकली शराब पी ली और बीमार पड़ गए. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां रविवार को उनकी मौत हो गई. दो अन्य मृतकों—करतार सिंह लोधी और दिग्विजय सिंह लोधी—ने भी कथित तौर पर इसी जहरीली नकली शराब का सेवन किया था.
इस बीच, जहरीली शराब त्रासदी होने से ठीक कुछ घंटे पहले आबकारी विभाग द्वारा संबंधित अधिकारियों को जारी उस आदेश ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें घातक शराब ब्रांड 'सागर गोल्ड' को 'जब्त करने' के निर्देश को बदलकर 'अब आगे किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है' कर दिया गया था. आबकारी विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को बताया कि जारी किए गए आदेशों का क्रम कुछ इस प्रकार था—'इसकी बिक्री रोकें', 'संदिग्ध स्टॉक जब्त करें', और फिर 'अन्य किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है'. इस मामले में शराब ठेकेदार समेत 30 लोगों पर केस दर्ज किया गया है और 14 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है.

