नीट 2024 पेपर लीक: सीबीआई को मुख्य आरोपी संजीव मुखिया के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला

पेपर लीक मामले में सरकार की जांच एजेंसियां क्या कर रही हैं, यह संतोष सिंह ने अपनी रिपोर्ट में बताया है. संतोष के अनुसार, सीबीआई ने 2024 नीट-यूजी पेपर लीक मामले में मुख्य संदिग्ध माने जा रहे संजीव मुखिया की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला है, और इसीलिए उसके खिलाफ कभी चार्जशीट दाखिल नहीं की गई थी. सीबीआई के अनुसार, गहन और विस्तृत जांच के बाद भी ऐसा कोई सबूत या साक्ष्य नहीं मिला जो संजीव मुखिया को प्रश्नपत्र की चोरी या उसके वितरण से जोड़ता हो.

यह मामला सबसे पहले 5 मई 2024 को पटना पुलिस द्वारा पकड़ा गया था, जिसे बाद में 23 जून 2024 को सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया गया.शुरुआत में, अन्य परीक्षा घोटालों में शामिल रहने के कारण बिहार पुलिस की एफआईआर में मुखिया पर भी संदेह जताया गया था. हालांकि, सीबीआई की जांच में चोरी और वितरण में शामिल असली अपराधियों तथा इसका लाभ उठाने वाले अभ्यर्थियों की पहचान की गई, जिसके आधार पर पटना अदालत में 45 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई. इसमें मुखिया की संलिप्तता का प्रमाण न मिलने पर उसके खिलाफ चार्जशीट दायर नहीं की गई और उसे जमानत मिल गई.  51 वर्षीय संजीव मुखिया बिहार के नालंदा का निवासी है और नालंदा स्थित एक उद्यान महाविद्यालय में पूर्व तकनीकी सहायक रह चुका है.  उसकी आपराधिक जड़ें 1990 के दशक में पेपर लीक के कुख्यात मास्टरमाइंड रणजीत डॉन से जुड़ती हैं. वह 2010 से ही ब्लूटूथ के जरिए नकल कराने, 2016 में उत्तराखंड सिपाही भर्ती लीक और बिहार के ब्लॉक-स्तरीय परीक्षा घोटालों में आरोपी रहा है.

बिहार की आर्थिक अपराध इकाई) के अनुसार, मुखिया एक संगठित और पेशेवर अंतरराज्यीय सॉल्विंग गैंग चलाता था। उसने परीक्षा प्रणाली के हर स्तर—जैसे प्रिंटिंग प्रेस, परिवहन और परीक्षा केंद्रों—की कमियों का फायदा उठाया. हजारीबाग में अंदरूनी सूत्रों की मदद से प्रश्नपत्र की तस्वीरें निकलवाना और प्रत्येक अभ्यर्थी से 8 से 15 लाख रुपये या उससे अधिक वसूलना उसके तरीके में शामिल था. 11 महीने की तलाश और 3 लाख रुपये के इनाम के बाद उसे पिछले साल अप्रैल में पटना में गिरफ्तार किया गया था.

मुखिया का पूरा परिवार भी विवादों में रहा है. उसके बेटे डॉ. शिव कुमार को 2024 में शिक्षक भर्ती परीक्षा लीक मामले में गिरफ्तार किया गया था. उसकी पत्नी ममता देवी 2016 से 2021 तक भुतहा खार पंचायत की मुखिया रही थीं (जिससे संजीव को 'मुखिया' नाम मिला). ममता देवी ने 2020 का बिहार विधानसभा चुनाव लोजपा के टिकट पर लड़ा था, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का हिस्सा है.

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