संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट: 2025 में संघर्षों के दौरान यौन हिंसा के करीब 10 हजार मामले दर्ज, इज़राइल और रूस ब्लैकलिस्ट में शामिल
“मकतूब मीडिया’ के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2025 में दुनिया भर के संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में यौन हिंसा के 9,788 सत्यापित मामलों का रिकॉर्ड दर्ज किया है. यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में दोगुने से भी अधिक है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव की वार्षिक रिपोर्ट में पहली बार इज़राइली और रूसी सशस्त्र तथा सुरक्षा बलों को उन पक्षों की सूची में शामिल किया गया है जिन पर संघर्ष के दौरान यौन हिंसा के पैटर्न अपनाने के आरोप हैं.
शुक्रवार को जारी इस रिपोर्ट को संघर्षों में यौन हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पैटन ने प्रस्तुत किया. रिपोर्ट में 21 संघर्ष प्रभावित देशों में बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, यौन दासता, जबरन विवाह, मानव तस्करी और अपहरण जैसे मामलों का दस्तावेजीकरण किया गया है.
रिपोर्ट के परिशिष्ट में 77 पक्षों के नाम शामिल किए गए हैं जिन्हें संघर्ष संबंधी यौन हिंसा के लिए जिम्मेदार माना गया है. इनमें से 62 गैर-राज्य सशस्त्र समूह हैं. इस वर्ष सूची में जिन नए पक्षों को जोड़ा गया है उनमें इज़राइली और रूसी सुरक्षा बलों के अलावा कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में सक्रिय तीन सशस्त्र समूह भी शामिल हैं.
रिपोर्ट के अनुसार गाजा और कब्जे वाले पश्चिमी तट में 31 पीड़ितों के खिलाफ संघर्ष संबंधी यौन हिंसा के मामलों की पुष्टि की गई. इनमें 14 पुरुष, 7 महिलाएं, 9 लड़के और एक लड़की शामिल हैं. दर्ज मामलों में बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, जननांगों पर हिंसा, जबरन नग्न करना, बलात्कार की धमकियां और बिना स्पष्ट सुरक्षा कारणों के कराई गई तलाशी शामिल हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि नौ पीड़ितों के साथ बलात्कार या सामूहिक बलात्कार की घटनाएं हुईं, जिनमें अधिकांश फिलिस्तीनी थे और गाजा से संबंध रखते थे. इन घटनाओं के लिए इज़राइली सशस्त्र और सुरक्षा बलों का नाम लिया गया है. कथित घटनाएं हिरासत, पूछताछ, सैन्य शिविरों, निरोध केंद्रों, चौकियों और सैन्य अभियानों के दौरान दर्ज की गईं. पीड़ितों में पत्रकार और मानवाधिकार रक्षक भी शामिल थे.
रिपोर्ट के अनुसार महिला बंदियों को मुख्य रूप से बलात्कार की धमकियों, जबरन नग्न किए जाने और अपमानजनक तलाशी का सामना करना पड़ा. वहीं पुरुषों और लड़कों के खिलाफ बलात्कार, बलात्कार के प्रयास और जननांगों पर हिंसा के मामले दर्ज किए गए. पांच पुरुष पीड़ितों को गंभीर शारीरिक चोटें आईं, जिनका असर कई दिनों या हफ्तों तक रहा.
यह रिपोर्ट मार्च 2025 में जारी संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की उस रिपोर्ट के बाद आई है जिसमें निष्कर्ष निकाला गया था कि इज़राइल ने फिलिस्तीनियों के खिलाफ यौन, प्रजनन और लैंगिक आधारित हिंसा के विभिन्न रूपों का बढ़ता हुआ इस्तेमाल किया है. आयोग ने यह भी कहा था कि गाजा में यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सुविधाओं के व्यवस्थित विनाश के जरिए ऐसे कृत्य किए गए जिन्हें उसने "नरसंहारात्मक कृत्य" की श्रेणी में रखा.
इज़राइल ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है. संयुक्त राष्ट्र में इज़राइल के राजदूत डैनी डैनन ने कहा कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों को इज़राइल आकर आरोपों की जांच करने का निमंत्रण दिया था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. इसके बाद इज़राइल के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के साथ संबंध समाप्त करने की घोषणा की.
रिपोर्ट में यूक्रेन में रूसी सशस्त्र और सुरक्षा बलों द्वारा किए गए यौन हिंसा के 310 मामलों की भी पुष्टि की गई है. इन मामलों में 280 पुरुष, 26 महिलाएं और चार लड़कियां प्रभावित हुईं. दर्ज घटनाओं में बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, जननांगों को नुकसान पहुंचाना, बिजली के झटके देना और जननांगों पर मारपीट शामिल है.
प्रमिला पैटन ने कहा कि 2025 में "युद्ध, यातना, आतंकवाद और राजनीतिक दमन की रणनीति" के रूप में यौन हिंसा में तेज वृद्धि हुई है. उन्होंने चेतावनी दी कि सत्यापित मामले वास्तविक स्थिति का केवल एक छोटा हिस्सा हैं और दंड से बच निकलने की संस्कृति अपराधियों को और अधिक निर्भीक बना रही है.
रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर महिलाएं और लड़कियां यौन हिंसा की सबसे बड़ी शिकार रहीं, लेकिन हिरासत केंद्रों में पुरुषों और लड़कों को भी अक्सर यातना के रूप में ऐसे अपराधों का सामना करना पड़ा. पीड़ितों की उम्र एक वर्ष से लेकर 70 वर्ष तक दर्ज की गई. विकलांग व्यक्तियों और LGBTQI+ समुदाय के लोगों के खिलाफ लक्षित उत्पीड़न और हिंसा का जोखिम भी अधिक पाया गया.
संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि कई मामलों में बलात्कार के बाद हत्याएं हुईं और कुछ पीड़ितों ने आत्महत्या कर ली. रिपोर्ट में कहा गया है कि सशस्त्र समूह समुदायों और संसाधन संपन्न इलाकों पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए यौन हिंसा का इस्तेमाल कर रहे हैं. साथ ही छोटे हथियारों का प्रसार, मानवीय सहायता तक सीमित पहुंच और वित्तीय संसाधनों की कमी पीड़ितों को सहायता पहुंचाने में बड़ी बाधाएं बन रही हैं.
रिपोर्ट में जवाबदेही तय करने, स्वतंत्र जांच को मजबूत करने, प्रतिबंधात्मक तंत्र लागू करने, मानवीय सहायता की पहुंच सुनिश्चित करने और पीड़ितों के लिए चिकित्सा, मनोसामाजिक तथा कानूनी सहायता बढ़ाने की मांग की गई है.

