बंगाल एसआईआर: ट्रिब्यूनल ने अब तक सिर्फ 2.17%  अपीलों का निपटारा किया; 37 लाख से अधिक अभी भी अधर में

पश्चिम बंगाल के राज्य अपीलीय न्यायाधिकरण को एसआईआर से संबंधित 38,10,620 अपीलें प्राप्त हुई थीं. 7 अगस्त 2026 तक इनमें से केवल 82,782 (मात्र 2.17%) अपीलों का ही निपटारा हो सका है. इसके परिणामस्वरूप विधानसभा चुनाव समाप्त होने के महीनों बाद भी लगभग 37.27 लाख अपीलें अधर में लटकी हुई हैं.

निपटाए गए मामलों में से 75,443 (91.13%) अपीलों में मतदाताओं के नाम पुनः सूची में शामिल किए गए, जबकि केवल 7,339 मामलों में निष्कासन को सही ठहराया गया. 91% से अधिक की यह पुनर्बहाली दर दर्शाती है कि न्यायाधिकरण द्वारा समीक्षा किए गए मामलों में अधिकांश नाम गलत तरीके से हटाए गए थे. पूर्व सैनिक मो. दुआल अली, सेवानिवृत्त विंग कमांडर मो. शमीम अख्तर, घरेलू सहायिका फिरोजा बीबी और लेखाकार मो. निहाल उद्दीन अनवर के मामले यह स्पष्ट करते हैं कि बिना किसी पूर्व सूचना, सुनवाई के अवसर के बिना या 2008 के परिसीमन से पहले के रिकॉर्ड्स के मिलान में आई तकनीकी/लिपिकीय त्रुटियों के कारण वैध नागरिकों के नाम काट दिए गए.

अपर्णा भट्टाचार्य की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 24 जिलों में अपीलों के निपटारे की दर में भारी अंतर है. सबसे अधिक प्रभावित जिलों जैसे मुर्शिदाबाद और मालदा (जहाँ कुल अपीलों का एक-तिहाई हिस्सा है) में निपटान दर सबसे कम रही है. जहाँ पुरुलिया ने अपनी अपीलों के एक-चौथाई हिस्से का फैसला किया, वहीं उत्तर 24 परगना में 3.58 लाख से अधिक अपीलों में से केवल 277 का ही निपटारा हो सका.

नाम बहाली की कानूनी और डिजिटल प्रक्रिया इतनी जटिल है कि निरक्षर या कम साधन संपन्न लोगों के लिए बिना कानूनी सहायता के अपील दायर करना बेहद कठिन है.

आरटीआई रिपोर्ट में दर्ज कुल अपीलों की संख्या 'अयोग्य' ठहराए गए मतदाताओं की संख्या से लगभग 10.82 लाख अधिक है. इसका कारण मुख्य निर्वाचन अधिकारी का फुटनोट स्पष्ट करता है कि कुल आंकड़ों में 'नाम हटाने' और 'नाम जोड़ने' दोनों प्रकार की आपत्तियां/अपीलें शामिल हैं.

चुनाव बीत जाने के कारण कई नागरिक अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित रह गए. इसके अलावा, नाम कटने के कारण कई पात्र लोग कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित हो रहे हैं और अपनी नागरिकता एवं पहचान को लेकर अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं.

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद स्थित भगवानगोला के निवासी मोहम्मद दुआल अली ने भारतीय सेना में सेवा दी थी और वर्दी में रहते हुए उन्हें गोली लगी थी. वह जीवित बचे और बाद में भारतीय रेलवे में काम करने लगे. मई 2026 में, जब पश्चिम बंगाल ने मतदान किया, तो उन्होंने वोट नहीं दिया — और न ही उनके तीन बच्चों ने. राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान उन सभी के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे. उन्होंने चार महीने से भी अधिक समय पहले न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) के समक्ष अपील दायर की थी, लेकिन अभी तक तारीख तय नहीं हुई है. उन्हें अभी भी नहीं पता कि उनके नाम क्यों हटाए गए.

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