एसआईआर: चार राज्यों की मतदाता सूची से 22 लाख से अधिक नाम हटाए गए

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने रविवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम की प्रारूप मतदाता सूचियां जारी कर दीं. इन चारों राज्यों में कुल 22 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं. यह संख्या इन राज्यों की पहले की मतदाता सूची का करीब 6.1 प्रतिशत है.

‘स्क्रोल’ के मुताबिक, ये चारों राज्य एसआईआर के तीसरे चरण का हिस्सा हैं. निर्वाचन आयोग देश के 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में यह विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चला रहा है.

ओडिशा में सबसे ज्यादा नाम हटे

ओडिशा में मतदाता सूची से 20 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आर. एस. गोपालन के अनुसार, इनमें 8.3 लाख मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी थी, करीब 10 लाख लोग स्थानांतरित हो चुके थे या सत्यापन के दौरान अनुपस्थित मिले, जबकि लगभग 1.5 लाख नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए.

इसके अलावा करीब 14,000 मतदाताओं ने बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) को अपने गणना प्रपत्र वापस नहीं सौंपे.

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची में नहीं हैं, वे बीएलओ, ईसीआईनेट मोबाइल ऐप या निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के माध्यम से दावा या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं.

20 मई को मतदाता सूची फ्रीज होने के समय ओडिशा में 3.3 करोड़ मतदाता थे, जो अब घटकर 3.1 करोड़ रह गए हैं. हटाए गए नामों पर दावा और आपत्ति 4 अगस्त तक दर्ज कराई जा सकेगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 6 सितंबर को प्रकाशित होगी.

मणिपुर में 1.5 लाख से अधिक नाम हटे

मणिपुर में 20.9 लाख मतदाताओं में से 1.5 लाख से अधिक नाम प्रारूप सूची से हटाए गए हैं. इनमें करीब 43,000 मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी थी, एक लाख से अधिक लोग स्थानांतरित हो गए थे और लगभग 7,400 नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए.

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अरुण कुमार सिन्हा के अनुसार, अब प्रारूप मतदाता सूची में 19.3 लाख मतदाता हैं. अंतिम सूची 6 सितंबर को जारी की जाएगी.

मिजोरम में सबसे कम कटौती

चारों राज्यों में मिजोरम में सबसे कम 5.2 प्रतिशत नाम हटाए गए. यहां 8.7 लाख मतदाताओं में से 8.2 लाख के नाम बरकरार रखे गए, जबकि 46,000 से अधिक नाम हटा दिए गए.

हटाए गए नामों में 21,200 से अधिक मृत मतदाता, 22,300 से अधिक स्थानांतरित मतदाता और करीब 2,250 ऐसे मतदाता शामिल हैं, जिनके नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज थे.

सिक्किम में 8 प्रतिशत मतदाता सूची से बाहर

सिक्किम में 37,000 से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए, जो पहले की मतदाता सूची का करीब 8 प्रतिशत हैं. एसआईआर शुरू होने से पहले राज्य में 4.7 लाख मतदाता थे, जबकि अब प्रारूप सूची में उनकी संख्या घटकर 4.3 लाख रह गई है.

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी राज यादव ने कहा कि कोई भी पात्र मतदाता उचित प्रक्रिया के बिना मतदान के अधिकार से वंचित नहीं होगा.

उन्होंने बताया कि घर-घर सर्वेक्षण 20 जून से 28 जून तक चला. 28 जून से 5 जुलाई के बीच प्रारूप मतदाता सूची तैयार की गई और उसे सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ साझा कर दिया गया है. पूरी सूची मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर भी उपलब्ध करा दी गई है, ताकि आम लोग अपने नामों का सत्यापन कर सकें.

विपक्ष ने पहले भी उठाए थे सवाल

एसआईआर के पहले दो चरणों के दौरान विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे. उनका आरोप था कि इस तरह का पुनरीक्षण मनमाने ढंग से बड़ी संख्या में मतदाताओं को मताधिकार से वंचित कर सकता है.

पहले चरण में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जुलाई से सितंबर के बीच यह प्रक्रिया चलाई गई थी, जिसमें अंतिम मतदाता सूची से 47 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए थे.

दूसरे चरण में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश सहित 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया. पश्चिम बंगाल में 6 अप्रैल तक करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा चुके थे, जो पुनरीक्षण शुरू होने से पहले कुल मतदाताओं का लगभग 11.9 प्रतिशत थे.

राज्य चुनाव से पहले विदेशी न्यायाधिकरणों के समक्ष करीब 34 लाख अपीलें लंबित थीं. इनमें 27 लाख अपीलें उन लोगों की थीं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे. इनमें से केवल 1,607 नामों को दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने की अनुमति मिली.

चुनावी नतीजों के एक विश्लेषण में यह भी सामने आया कि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी द्वारा जीती गई आधी सीटों पर मतदाता सूची से हटाए गए नामों की संख्या जीत के अंतर से अधिक थी.

Previous
Previous

नाटो शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर ट्रंप ने इटली की मेलोनी को फिर उकसाया

Next
Next

आधिकारिक दस्तावेजों से परे, नागरिक होने और इस देश से जुड़ाव का अधिकार