वोटर लिस्ट से नाम कटने की राजनीति और भारत में नागरिकता का हक खोने का खतरा
भारत में चुनाव आयोग की 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया के तहत 14 राज्यों में करीब 6 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे जा चुके हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह महज प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि वोटिंग अधिकार और नागरिकता को जोड़ने की एक गहरी कूटनीतिक रणनीति है. पढ़ें 'आर्टिकल 14' की यह विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट.
क्या खतरे में है भारत की चुनावी निष्पक्षता?
हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद भारत की चुनावी प्रणाली पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. हारने वाले दलों ने मतदान के आंकड़ों और ईवीएम की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं. पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के नतीजों ने न केवल सत्ता के समीकरण बदले हैं, बल्कि चुनावी शुचिता को लेकर नई चिंताएं भी पैदा कर दी हैं. मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दे मतदाता सूची का पुनरीक्षण, आगामी परिसीमन और ईवीएम संदेह लोकतंत्र की साख को प्रभावित कर रहे हैं.

