आनंद तेलतुंबड़े | भारत की नागरिकता की पहेली ऐसे दस्तावेज़ मांगती है, जो कुछ भी साबित नहीं करते
आनंद तेलतुंबड़े का विशेष विश्लेषण. विदेश मंत्रालय के पासपोर्ट बयान के बाद भारत में नागरिकता के अंतिम प्रमाण और चुनाव आयोग की एसआईआर (SIR) प्रक्रिया से जुड़े संवैधानिक व कानूनी संकट की समीक्षा.
अध्ययन: बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान जांच के दायरे में आए 27 लाख मतदाताओं में 70% मुसलमान
‘स्क्रोल’ की रिपोर्ट. पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में जांच के दायरे में आए 27 लाख से अधिक मतदाताओं में करीब 70% मुस्लिम; ‘सबर इंस्टीट्यूट’ के विश्लेषण में बड़ा दावा.
एसआईआर: चार राज्यों की मतदाता सूची से 22 लाख से अधिक नाम हटाए गए
'स्क्रोल' की रिपोर्ट. भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तीसरे चरण में ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम से 22 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटे; विपक्ष ने लगाया चुनावी प्रक्रिया पर सवाल.
एसआईआर ‘चंद लोगों के लोकतंत्र’ का मार्ग प्रशस्त कर सकता है: परकला प्रभाकर
'द हिंदू' की रिपोर्ट. अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर का बड़ा दावा; भारत निर्वाचन आयोग के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) से 16 करोड़ लोगों का मताधिकार छिनने का खतरा, दलित-अल्पसंख्यक को लोकतंत्र से बाहर करने की साजिश का आरोप.
वोटर लिस्ट से नाम कटने की राजनीति और भारत में नागरिकता का हक खोने का खतरा
भारत में चुनाव आयोग की 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया के तहत 14 राज्यों में करीब 6 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे जा चुके हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह महज प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि वोटिंग अधिकार और नागरिकता को जोड़ने की एक गहरी कूटनीतिक रणनीति है. पढ़ें 'आर्टिकल 14' की यह विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट.
क्या खतरे में है भारत की चुनावी निष्पक्षता?
हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद भारत की चुनावी प्रणाली पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. हारने वाले दलों ने मतदान के आंकड़ों और ईवीएम की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं. पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के नतीजों ने न केवल सत्ता के समीकरण बदले हैं, बल्कि चुनावी शुचिता को लेकर नई चिंताएं भी पैदा कर दी हैं. मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दे मतदाता सूची का पुनरीक्षण, आगामी परिसीमन और ईवीएम संदेह लोकतंत्र की साख को प्रभावित कर रहे हैं.

