पश्चिम बंगाल: राज्यव्यापी सर्वे के बाद 252 मदरसा बंद करने का आदेश

पश्चिम बंगाल में सत्ता में आने के चार महीनों के भीतर कराए गए एक सर्वेक्षण के बाद, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने 252 मदरसों को तत्काल बंद करने का आदेश दिया है और अन्य 100 मदरसों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. राज्य अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा विभाग ने गैर-सहायता प्राप्त मदरसों के मैदानी निरीक्षण में न्यूनतम बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) न पाए जाने के बाद यह कदम उठाया है. इसके मंत्री क्षुदिराम टुडू ने चेतावनी दी है कि जिन 100 मदरसों को नोटिस थमाया गया है, यदि उनके जवाब असंतोषजनक पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

राजीब चौधुरी की रिपोर्ट के अनुसार, जिन मदरसों को बंद करने के लिए कहा गया है, उनमें से कई तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल के दौरान बिना किसी जांच-परख के अस्तित्व में आ गए थे. जिलों में, उत्तरी बंगाल का मालदा लगभग 44-45 मदरसों के बंद होने के साथ सूची में सबसे ऊपर है, जबकि उसी क्षेत्र का उत्तर दिनाजपुर लगभग 37 मदरसों के साथ दूसरे स्थान पर है. इसके बाद दक्षिण बंगाल के दक्षिण 24 परगना में 32 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया गया है. मुर्शिदाबाद और नादिया प्रत्येक जिले में लगभग 25-25 मदरसों को बंद करने के लिए कहा गया है.

राज्य के पंचायत मंत्री दिलीप घोष ने दावा किया कि कई मामलों में उग्रवादी गतिविधियों में कथित संलिप्तता के लिए गिरफ्तार किए गए लोग इनमें से कुछ संस्थानों में शिक्षकों के रूप में काम करते पाए गए थे.

घोष ने कहा, "मदरसों के खिलाफ बार-बार शिकायतें आ रही थीं. इन संस्थानों से राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को अंजाम देने वाले लोगों के भी उदाहरण सामने आए हैं. जो मदरसे कानून और सरकारी अनुमति के अनुसार चलाए जा रहे हैं, वे बने रहेंगे. लेकिन सरकार अंधाधुंध मदरसे खोलने और उपद्रव पैदा करने की अनुमति नहीं देगी."

हालांकि, बेलेघाटा से टीएमसी विधायक और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि सभी मदरसों को एक ही नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए.

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