जहरीली शराब से मध्यप्रदेश में 36 मौतों के बाद अब नगालैंड में 9 की मौत
नगालैंड के तुएनसांग सिविल अस्पताल में जहरीली शराब पीने से कम से कम नौ लोगों की मौत के बाद राज्य में हड़कंप मच गया है. पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रूपिन शर्मा ने पूरे राज्य में रेड अलर्ट जारी करते हुए मामले की जांच के आदेश दिए हैं. डीजीपी ने तुएनसांग, मोन, मोकोकचुंग, लोंगलेन्ग, किफिरे, शमातोर और नोकलाक सहित अन्य जिलों के नागरिकों से शराब का सेवन न करने की अपील की है. उधर, मध्यप्रदेश के सागर में जहरीली शराब के सेवन से मरने वालों की संख्या बढ़कर 36 हो गई है. शनिवार को दो लोगों की मौत हुई, जिनमें एक पंचायत सचिव भी शामिल है. गंभीर रूप से पीड़ित लोगों का अभी भी अस्पतालों में इलाज चल रहा है.
रत्नदीप चौधरी की रिपोर्ट के अनुसार, इस दुखद हादसे ने 1990 से लागू 'नगालैंड शराब पूर्ण प्रतिबंध अधिनियम (एनएलटीपी), 1989' की विफलताओं को एक बार फिर उजागर कर दिया है. चर्च और नागरिक समाज की मांग पर घरेलू हिंसा रोकने व सामाजिक सुधार के उद्देश्य से बने इस कानून को 35 साल बाद अब असफल माना जा रहा है.
विधानसभा में पेश आबकारी विभाग की रिपोर्ट और आबकारी सलाहकार मोआतोशी लोंगकुमेर के अनुसार, शराबबंदी के कारण राज्य में अवैध और जहरीली शराब का काला कारोबार फल-फूल रहा है. अकेले कोहिमा के 19 वार्डों में कोल्ड ड्रिंक और पान की दुकानों के भेष में 500 से अधिक अवैध आउटलेट पाए गए हैं.
असम से सटी खुली सीमा का फायदा उठाकर शराब माफिया लाहोरीजन जैसे सीमावर्ती शहरों से अवैध सप्लाई चला रहे हैं. शराब महंगी और अवैध होने के कारण युवा सस्ते लेकिन अधिक जानलेवा ड्रग्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं. राज्य को सालाना सैकड़ों करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र भी प्रभावित हैं.
मुख्यमंत्री नेफियू रियू का मानना है कि सरकार बिक्री को नियंत्रित कर सकती है, लेकिन जब तक मांग है, आपूर्ति बनी रहेगी. इस स्थिति को देखते हुए 'एसोसिएशन ऑफ कोहिमा म्यूनिसिपल वार्ड्स काउंसिल' जैसे संगठनों ने शराबबंदी हटाने और सख्त लाइसेंसिंग प्रणाली लागू करने की मांग की है, जिसमें स्कूलों के पास प्रतिबंध, आयु सत्यापन और आबकारी शुल्क से नशा मुक्ति केंद्र चलाने जैसे सुझाव शामिल हैं.

