अध्ययन: बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान जांच के दायरे में आए 27 लाख मतदाताओं में 70% मुसलमान

‘स्क्रोल’ के मुताबिक, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान जांच (एडजुडिकेशन) के दायरे में आए 27 लाख से अधिक मतदाताओं में करीब 70 प्रतिशत मुसलमान थे. यह दावा कोलकाता स्थित शोध संस्थान ‘सबर इंस्टीट्यूट’ के एक विश्लेषण में किया गया है.

संस्थान ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने विश्लेषण में कहा कि इस श्रेणी में शामिल मतदाताओं में 51 प्रतिशत महिलाएं थीं.

सबर इंस्टीट्यूट के अनुसार, इन अधिकांश मतदाताओं को पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कथित "लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी" यानी तार्किक विसंगतियों के आधार पर जांच के दायरे में रखा गया.

मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान "लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी" से आशय माता-पिता के नाम में असंगति, माता-पिता और संतान के बीच कम आयु अंतर, या किसी परिवार में छह से अधिक बच्चों का दर्ज होना जैसी विसंगतियों से है.

पश्चिम बंगाल में फरवरी में प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची से शुरुआत में 61 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए थे. इसके बाद पूरक सूचियों और लगभग 60 लाख "संदिग्ध एवं लंबित" मामलों की जांच की प्रक्रिया जारी रही.

6 अप्रैल तक पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू होने से पहले राज्य के कुल मतदाताओं का लगभग 11.9 प्रतिशत, यानी करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके थे.

विधानसभा चुनाव से पहले अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष करीब 34 लाख अपीलें लंबित थीं. इनमें से 27 लाख अपीलें उन लोगों की थीं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे.

विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत गठित इन न्यायाधिकरणों ने अब तक 1,607 लोगों के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने की अनुमति दी है.

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