कैथोलिक चर्च ने विदेशी अंशदान विधेयक पर फिर जताई चिंता, 28 जून को राष्ट्रीय प्रार्थना दिवस का आव्हान
भारत में कैथोलिक चर्च ने प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है. इसके विरोध में आगामी 28 जून को देशव्यापी 'राष्ट्रीय प्रार्थना दिवस' मनाने का निर्णय लिया गया है. 'कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया' (सीबीसीआई) के अध्यक्ष कार्डिनल एंथनी पूला द्वारा जारी एक परिपत्र में सभी ईसाई समुदायों से एकजुट होकर प्रार्थना करने, उपवास रखने और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से केंद्र सरकार को विरोध-ज्ञापन सौंपने का आग्रह किया गया है. चर्च का मानना है कि इस कानून से उनके द्वारा संचालित धर्मार्थ, शैक्षणिक और स्वास्थ्य सेवाओं पर बेहद नकारात्मक असर पड़ेगा.
‘द टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया यह विधेयक कई वजहों से विवादों में है. अल्पसंख्यक संगठनों का आरोप है कि यह कानून शक्तियों के अत्यधिक केंद्रीकरण और अधिकारियों के विवेकाधीन हस्तक्षेप को बढ़ावा देता है. सीबीसीआई के महासचिव महाधर्माध्यक्ष अनिल जे.टी. कूटो के अनुसार, विधेयक में पूजा स्थलों को तो सीमित सुरक्षा दी गई है, लेकिन धर्मार्थ और शैक्षणिक संस्थानों के लिए किसी सुरक्षा उपाय का प्रावधान नहीं है. इससे संस्थाओं के आंतरिक प्रबंधन में सरकारी दखल का खतरा बढ़ेगा.
कांग्रेस सहित प्रमुख विपक्षी दलों ने इस विधेयक को अल्पसंख्यकों, नागरिक समाजों और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओज़) पर सीधा हमला बताया है. विपक्ष इसकी तुलना वक्फ (संशोधन) विधेयक से कर रहा है, जिससे ईसाई समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है. इस सिलसिले में तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इसे वापस लेने की मांग की है. संसद में भी विपक्ष द्वारा इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा चुका है.

