भारत के नक्शे में लद्दाख में चीन सीमा से लगे 28 स्थानों में गलवान के पास घुसपैठ वाले स्थलों की पहचान

भारत के आधिकारिक मानचित्र में पहली बार लद्दाख में चीन सीमा के पास 28 स्थलों और भौगोलिक विशेषताओं को उनके मानक नामों से चिन्हित किया गया है. इनमें गलवान घाटी के पास गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स भी शामिल हैं, जहाँ मई 2020 में चीनी सेना द्वारा कथित तौर पर अतिक्रमण किया गया था.

इस घुसपैठ के कारण 15 जून, 2020 को गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें 20 भारतीय सैनिक और कम से कम चार चीनी सैनिक मारे गए थे. रिपोर्ट्स के अनुसार, चीनी सेना अभी भी गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स में भारत के दावे वाले क्षेत्रों के भीतर बने "बफर जोन" में मौजूद है.

सूत्रों ने ‘द टेलीग्राफ’ को बताया कि केंद्र ने लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के परामर्श से यह नवीनतम कदम उठाया है. इसका उद्देश्य आधिकारिक मानचित्रण को सुव्यवस्थित करना, सटीक पहचान की सुविधा प्रदान करना और इस संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र के बारे में जनता के बीच बेहतर जागरूकता को बढ़ावा देना है. यह कदम भारत के आधिकारिक मानचित्र द्वारा अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा से लगे 27 स्थलों और भौगोलिक विशेषताओं को उनके मानक नामों से चिन्हित करने के दो महीने बाद आया है, जो बीजिंग के आधिकारिक दस्तावेजों में राज्य के स्थानों के लिए मंदारिन नामों के बार-बार उपयोग का मुकाबला करता है.

उल्लेखनीय है कि मई 2020 में, चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पार गलवान घाटी, गोगरा, हॉट स्प्रिंग्स और पैंगोंग झील के उत्तरी व दक्षिणी तटों जैसे क्षेत्रों में भारत द्वारा दावा की गई सीमाओं के भीतर अपने सैनिकों को भेजा, तंबू गाड़े और निगरानी चौकियां बनाईं.

गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद, चीनियों ने पीपी-15 और पीपी-17ए पर भारतीय गश्ती मार्गों को अवरुद्ध कर दिया था, जिससे दोनों देशों की सेनाएं लंबे समय तक आमने-सामने की स्थिति में आ गई थीं.

केंद्र सरकार इस बात से इनकार करती है कि भारत ने चीन से एक इंच भी ज़मीन खोई है. गलवान झड़प के चार दिन बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कोई घुसपैठ नहीं हुई है, जिससे बीजिंग को किसी भी सीमा उल्लंघन से इनकार करने और इस क्षेत्र में अपने कब्जे वाले सभी क्षेत्रों पर अपना स्वामित्व जताने का मौका मिला.

द्विपक्षीय राजनयिक और सैन्य वार्ताओं के परिणामस्वरूप, चीनी सेना 2022 में घुसपैठ के कई बिंदुओं से "आंशिक रूप से" पीछे हट गई थी. दोनों पक्षों ने तनाव और टकराव कम करने के लिए समन्वित वापसी की, अस्थायी संरचनाओं को हटाया और गलवान घाटी, पैंगोंग झील के दक्षिणी व उत्तरी तटों, हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा में अस्थायी बफर ज़ोन (गैर-गश्ती क्षेत्र) स्थापित किए.

हालांकि इन बिंदुओं से सेनाओं के पीछे हटने से सीधे संपर्क बिंदुओं पर तनाव कम हुआ है, लेकिन बड़े सीमावर्ती मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं.

सैन्य दिग्गज (पूर्व सैन्य अधिकारी) लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि भारत चीन से पूर्व स्थिति को बहाल करने और मई 2020 से उसके द्वारा कब्जे में लिए गए क्षेत्रों से वापस जाने को कहे. उन्हें डर है कि इन घुसपैठ बिंदुओं पर भारत के दावे वाली सीमाओं के भीतर गैर-सैन्यीकृत "बफर ज़ोन" के निर्माण से अंततः चीन भारत को एलएसी की पुनर्व्याख्या पर सहमत होने के लिए मजबूर कर सकता है.

सैन्य दिग्गजों ने मोदी सरकार पर समर्पण का आरोप लगाते हुए कहा है कि विसैन्यीकृत क्षेत्रों (बफर जोन) को उसकी स्वीकृति ने अप्रैल 2020 से पहले की स्थिति की बहाली को कठिन बना दिया है.

अतीत में, लद्दाख के स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों ने चीन के साथ सेना की वापसी की प्रक्रिया के तहत अपने क्षेत्र के भीतर गैर-गश्ती "बफर ज़ोन" पर भारत की सहमति पर चिंता व्यक्त की थी.

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