वायुसेना प्रमुख ने पाकिस्तान-चीन सांठगांठ पर जताई चिंता, कहा- 42 स्क्वाड्रन की क्षमता के मुकाबले हमारे पास केवल 29 स्क्वाड्रन मौजूद

भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने शनिवार को कहा कि पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के निर्माण के लिए चीन के साथ पाकिस्तान का सहयोग भारत के लिए "चिंता का कारण" है.

वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि वायुसेना फिलहाल इस खतरे को टालने में सक्षम होगी, लेकिन भारत को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को जल्द से जल्द अपने बेड़े में शामिल करना होगा.

सिंह ने कहा, "इसमें कोई शक नहीं कि यह चिंता का कारण है. लेकिन क्या यह ऐसी स्थिति है जो पूरी तरह से हमारे नियंत्रण से बाहर (नो-गो) है? मैं इससे सहमत नहीं होऊँगा. हमारे पास क्षमताएं हैं. बात सिर्फ एक प्लेटफॉर्म की इतनी नहीं होती, बल्कि आपके सिस्टम में उस प्लेटफॉर्म का एकीकरण (इंटीग्रेशन) मायने रखता है. ठीक वैसे ही जैसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के पास अन्य प्लेटफॉर्म मौजूद थे, लेकिन वे उनसे ज्यादा कुछ नहीं कर सके."

‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ के अनुसार, सिंह ने कहा कि भारतीय वायु सेना के पास वर्तमान में स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन की क्षमता के मुकाबले केवल 29 फाइटर स्क्वाड्रन मौजूद हैं.

उन्होंने कहा कि इस कमी को दूर करने के लिए वायुसेना को हर साल 36 से 40 फाइटर जेट्स को बेड़े में शामिल करने की आवश्यकता है.

उन्होंने कहा, "पांचवीं पीढ़ी के एएमसीए (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) और अन्य कार्यक्रमों में देरी होने की स्थिति में हमें अन्य फाइटर प्लेटफॉर्म्स की ओर देखना पड़ सकता है."

पांचवीं पीढ़ी के वैकल्पिक लड़ाकू विमान की संभावना पर सिंह ने कहा कि रूस ने भारत को अपने Su-57 विमानों की पेशकश की है, लेकिन इस प्रस्ताव पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है.

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