शातिर मेहमान, जिसने कभी चेक-आउट नहीं किया: कैसे लक्जरी होटलों को चकमा देते हुए 30 साल बिताए

यह कहानी तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले के रहने वाले 69 वर्षीय विंसेंट जॉन की है, जिसने अपनी शालीनता, सफेद बालों और धाराप्रवाह अंग्रेजी के दम पर पिछले 30 वर्षों से देश भर के सैकड़ों पांच सितारा और लक्जरी होटलों को चूना लगाया. पहली नज़र में एक बेहद संभ्रांत और आदर्श मेहमान दिखने वाले जॉन को हाल ही में रायपुर पुलिस ने ओडिशा के भुवनेश्वर से गिरफ्तार किया है.

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में जयप्रकाश एस नायडू की रिपोर्ट है कि जॉन के अपराध करने का तरीका बेहद योजनाबद्ध और चतुराई से भरा था, जो कुख्यात ठग चार्ल्स शोभराज की चालाकी से प्रेरित था. वह जब भी किसी लक्जरी होटल में चेक-इन करता, तो अपने साथ हमेशा दो डफल बैग रखता था.

वह कभी भी होटल के स्टाफ को अपना सामान उठाने नहीं देता था. एक बैग में उसका वास्तविक सामान होता था, जबकि दूसरे बैग में वह अखबार या तकिए भरकर रखता था. होटल से भागते समय वह अखबारों वाला बैग कमरे में ही छोड़ देता था, ताकि कर्मचारियों को लगे कि वह अभी होटल में ही रुका हुआ है.

शुरुआत में वह चेक-इन के लिए अपने पहचान पत्र (जैसे दस्तावेज़) का उपयोग करता था, लेकिन पुलिस द्वारा इसे जब्त किए जाने के बाद वह केवल फोटोकॉपी का इस्तेमाल करने लगा.

25 जून को जॉन ने खुद को एक इवेंट ऑर्गनाइज़र बताकर रायपुर के एक आलीशान पांच सितारा होटल में प्रवेश किया. अपनी बेहतरीन अंग्रेजी और मीठी बातों से उसने होटल के एक कर्मचारी को बेहतर नौकरी का झांसा दिया और उससे 1.48 लाख रुपये का लैपटॉप ऐंठ लिया. इसके अलावा उसने कमरे में विदेशी सिगरेट और महंगी शराब की बोतलें मंगवाईं, जबकि वह खुद नशा नहीं करता था.

दो दिन रुकने के बाद उसने रिसेप्शन पर जाकर अपने कथित बेटे के लिए एक और कमरा बुक करने का नाटक किया. 27 जून की सुबह वह 63,755 रुपये का बिल चुकाए बिना चुपके से फरार हो गया. होटल प्रबंधन की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस के जरिए उसे भुवनेश्वर से दबोच लिया. भागने के बाद वह चोरी का लैपटॉप, शराब और सिगरेट बेच चुका था.

पूछताछ में सामने आया कि 1980 के दशक में दिल्ली में टूरिस्ट गाइड के रूप में काम करने के दौरान उसे होटलों में ठहरने का चस्का लगा. एक बार किसी लक्जरी होटल के प्रबंधन द्वारा अपमानित किए जाने के बाद उसने इन आलीशान जगहों से बदला लेने की ठान ली. वह पहली बार 1996 में दिल्ली पुलिस द्वारा पकड़ा गया था. इसके बाद वह 2016 में दिल्ली के ओखला स्थित होटल क्राउन प्लाजा में धोखाधड़ी और 2020 में नवी मुंबई में भी गिरफ्तार हो चुका है. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, गोवा, केरल और तमिलनाडु सहित कई राज्यों में मामले दर्ज हैं. वह 300 से अधिक होटलों से कीमती सामान चुराने का दावा करता है.

लक्जरी होटल अक्सर अपनी साख और प्रतिष्ठा खराब होने के डर से छोटी-मोटी रकम के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से बचते हैं, जिसका जॉन ने भरपूर फायदा उठाया. इसके अलावा, वह अपनी ढलती उम्र का फायदा उठाकर पुलिस के सामने बेहद भावुक और पश्चाताप से भरी कहानियां गढ़ता था. इस बार भी उसने रायपुर पुलिस से वादा किया कि यह उसकी आखिरी चोरी थी और वह गोवा के एक वृद्धाश्रम में बसना चाहता है. हालांकि, नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) रमाकांत साहू के अनुसार, वह हर बार पुलिस विभागों को यही कहानी सुनाकर गुमराह करता रहा है, इसलिए उसकी इन बातों पर अब यकीन नहीं किया जा सकता.

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