फुकेट से आ रहा ए320 विमान टर्बुलेंस के कारण 300 फीट नीचे नहीं गिरा, वह फ्लाइट-कंट्रोल खराबी का शिकार हुआ था
4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान (AI 2379 - एयरबस A320 नियो) में हुई दुर्घटना का मुख्य कारण 'हवा के झोंके' (टर्बुलेंस) नहीं, बल्कि विमान के हाइड्रोलिक और फ्लाइट-कंट्रोल सिस्टम में आई तकनीकी खराबी थी.
जागृति चंद्रा की रिपोर्ट के अनुसार, उड़ान भरने के लगभग ढाई घंटे बाद (सुबह 9:32 बजे) विमान में तकनीकी विफलताओं का सिलसिला शुरू हुआ. A320 नियो में तीन स्वतंत्र हाइड्रोलिक सिस्टम होते हैं, जो उड़ान नियंत्रण और लैंडिंग गियर जैसी महत्वपूर्ण प्रणालियों को संचालित करते हैं. इस घटना के दौरान एक ही मिनट के भीतर नौ त्रुटि (फॉल्ट) संदेश दर्ज किए गए, जिनमें तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम अलग-अलग संयोजनों में प्रभावित हुए. इसके बाद ऑटोपायलट स्वतः डिस्कनेक्ट हो गया और विमान की नाक को ऊपर-नीचे नियंत्रित करने वाले दोनों 'एलिवेटर' में खराबी के संकेत मिले.
तकनीकी खराबी के कारण जब विमान की नाक ऊपर उठी और स्टॉल (ऊंचाई में कमी) की चेतावनी जारी हुई, तब एक पायलट ने मैनुअल नियंत्रण संभाला. विमान को स्थिर करने के प्रयास में किए गए तीव्र बल प्रयोग के कारण विमान अचानक लगभग 300 फीट नीचे गिर गया, जिससे यात्री और क्रू सदस्य ऊपर उछल गए और 13 लोग घायल हो गए. हालांकि, पायलटों के इस हस्तक्षेप के बाद सिस्टम में सुधार आ गया.
पायलटों ने घायल यात्रियों के उपचार और बेहतर इंजीनियरिंग सहायता को ध्यान में रखते हुए किसी नजदीकी हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग करने के बजाय दिल्ली की यात्रा जारी रखने का निर्णय लिया.
इस घटना को गंभीर श्रेणी में रखा गया है और 'विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो' (एएआईबी) इसकी जांच कर रहा है. एयर इंडिया ने शुरुआत में इस घटना का कारण टर्बुलेंस बताया था, लेकिन बाद में एयरलाइन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय दोनों ने अपने बयानों में टर्बुलेंस या तकनीकी खराबी का कोई स्पष्ट जिक्र नहीं किया. फिलहाल, एयर इंडिया ने विमान निर्माता कंपनी एयरबस से तकनीकी मूल्यांकन की मांग की है और उनके जवाब का इंतजार किया जा रहा है.
डीजीसीए ने उड़ानों में 889 गंभीर तकनीकी कमियां दर्ज कीं, जो 2024 के 692 से अधिक हैं
विमानन नियामक डीजीसीए ने 2024 में दर्ज 692 तकनीकी कमियों की तुलना में इस बार उड़ानों में 889 गंभीर तकनीकी कमियां दर्ज की हैं.
‘पीटीआई’ के अनुसार, दर्ज की गई गंभीर कमियों की संख्या 2023 और 2022 में क्रमशः 487 और 528 थी. वहीं 2021 में यह संख्या 514 रही थी. ये आंकड़े नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के हिस्से के रूप में साझा किए.

