मणिपुर में बंदूकधारियों ने 4 कुकी-ज़ो नागरिकों की हत्या की
मणिपुर में रविवार (13 सितंबर 2026) को दो अलग-अलग घटनाओं में अज्ञात बंदूकधारियों ने दो महिलाओं सहित कुकी-ज़ो समुदाय के चार नागरिकों की हत्या कर दी.
हालांकि किसी भी उग्रवादी गुट ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन कुकी-ज़ो संगठनों ने इन हमलों के लिए नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम या एनएससीएन (इसाक-मुइवा) और जेलियांग्रॉन्ग यूनाइटेड फ्रंट (कमसन) को जिम्मेदार ठहराया है.
कुकी-ज़ो संगठनों के अनुसार, पहला हमला तड़के करीब 4 बजे तमेंगलॉन्ग जिले के टॉलेन गांव में हुआ. हमले में सेनेह सिंगसित और उनकी पत्नी ल्हिंगज़ंगाई की मौत हो गई, जबकि उनका छह साल का बेटा घायल हो गया.
‘द हिंदू’ में राहुल कर्माकर की रिपोर्ट है कि महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके पति ने पास के अस्पताल में दम तोड़ा. नाबालिग बच्चे का इलाज चल रहा है, जिसके शरीर में गोली धंसी होने की खबर है.
दूसरी घटना दोपहर करीब 3 बजे नोने जिले के लोंगपी गांव में हुई. स्थानीय निवासियों ने बताया कि बंदूकधारियों ने चावल ले जा रहे तीन लोगों पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई.
मृतकों की पहचान जूली गांगते और थांगरोएल गांगते के रूप में हुई है. तीसरी व्यक्ति, जो कि एक महिला है, उसके लापता होने की सूचना है.
पहले हमले की निंदा करते हुए, 'कुकी इनपी जेटीएन' (जिरिबाम, तमेंगलॉन्ग और नोने जिले) ने एक बयान में कहा, "यह अमानवीय कृत्य केवल एक परिवार पर हमला नहीं है; यह स्वयं मानवता पर एक प्रहार है. कुकी इनपी जेटीएन पीड़ित परिवार के साथ एकजुटता से खड़ा है और बिना किसी देरी के न्याय की मांग करता है."
कुकी-ज़ो संगठन 'वेस्टर्न विलेज वॉलंटियर' (जिरिबाम, तमेंगलॉन्ग और नोने) ने मांग की कि 24 घंटे के भीतर हत्यारों की पहचान कर उन्हें पकड़ा जाए और न्याय के कटघरे में लाया जाए. उसने चेतावनी दी कि समय पर न्याय सुनिश्चित न होने पर वह "अपराधियों पर अपना पूरा गुस्सा निकालने" के लिए मजबूर होगा.
इस बीच, मणिपुर सरकार ने 'कैम्पेन फॉर जस्टिस एंड फेयर डिलिमिटेशन' से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को अद्यतन (अपडेट) करने की मांग को लेकर केंद्रीय और राज्य सरकार के कार्यालयों में जारी अपने बंद को वापस लेने की अपील की.
सरकारी प्रवक्ता और विधायक थ. राधेस्याम तथा सपम रंजन सिंह ने कहा कि इस अभियान को मणिपुर के लोगों की "तकलीफों और असुविधाओं को और नहीं बढ़ाना चाहिए", जो जनगणना की प्रक्रिया से पहले "एनआरसी लागू कराना चाहते हैं."
सरकार ने सुझाव दिया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा मणिपुर में जनगणना प्रक्रिया को स्थगित करने के बाद एनआरसी-समर्थक आंदोलन को तेज करने का अभियान का फैसला अनुचित है. प्रवक्ताओं ने यह भी ध्यान दिलाया कि मणिपुर विधानसभा ने एनआरसी अपडेट करने के लिए 1951 को आधार वर्ष बनाने का समर्थन किया था, जैसा कि मणिपुर के अधिकांश निवासी चाहते थे.

