मुंबई में सीजेपी नेताओं समेत 400 से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का मामला
'हिंदुस्तान टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई पुलिस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके, संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास समेत 400 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. यह प्रदर्शन शुक्रवार को मुंबई के शिवाजी पार्क में हुआ था.
पुलिस ने दिपके, रांका और दास के अलावा सीजेपी के सदस्य प्रणव अहिरे, अजिंक्य शिंदे, अफरीन नवाज, सौम्या कोरडे, अंकित भारद्वाज, विजय मलांगी और योगेश इंगले को भी एफआईआर में नामजद किया है. पुलिस के मुताबिक, किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है.
सीजेपी ने इस प्रदर्शन का आह्वान किया था. दिपके ने शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, लेकिन पुलिस ने 27 सितंबर को इसे मंजूरी नहीं दी. इसके बाद उन्होंने ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू करने की घोषणा की थी. शुक्रवार के प्रदर्शन के दौरान मुंबई में किसी को हिरासत में नहीं लिया गया, जबकि दिल्ली के जंतर-मंतर पर इसी मुद्दे को लेकर हुए प्रदर्शन में 700 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था.
मुंबई पुलिस ने प्रदर्शन के आयोजकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की उन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जो गैरकानूनी जमावड़े और लोक सेवक द्वारा जारी वैध आदेश की जानबूझकर अवहेलना से संबंधित हैं. पुलिस के मुताबिक, शिवाजी पार्क क्षेत्र के एक निवासी की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई.
प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं मिली?
पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति खारिज करते हुए कहा था कि 2013 के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार शिवाजी पार्क का इस्तेमाल केवल खेल गतिविधियों के लिए किया जा सकता है. पुलिस ने यह भी कहा था कि प्रदर्शन से आसपास के आवासीय क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण हो सकता है और इलाके में कई बड़े अस्पताल होने के कारण यातायात प्रभावित होने से मरीजों की आवाजाही पर असर पड़ सकता है.
इसके जवाब में दिपके ने जनवरी में इसी स्थान पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के एक कार्यक्रम का वीडियो साझा करते हुए सवाल उठाया था कि उन्हें वहां कार्यक्रम की अनुमति कैसे मिली.
दिल्ली में प्रदर्शन का ऐलान
सीजेपी ने कहा है कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो वह 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर मार्च और प्रदर्शन करेगी. दिपके ने कहा कि अगर दिल्ली पुलिस उन्हें रोकती है, तो जहां रोका जाएगा, वही स्थान उनका जंतर-मंतर होगा. उन्होंने आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने की बात कही है.
सीजेपी ने चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी सवाल उठाए हैं. इन प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की एक रिपोर्ट भी है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में एसआईआर से जुड़े फैसलों पर 14 बार आपत्ति दर्ज की थी.
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने फॉर्म 6 में बदलाव, पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के खिलाफ अपील और गोवा में मतदाता डेटा के प्रबंधन सहित कई मुद्दों पर आपत्ति जताई थी. एसआईआर जून 2025 में शुरू हुआ था और तब से इसके क्रियान्वयन के तरीके और गति को लेकर सवाल उठते रहे हैं. आलोचकों ने आशंका जताई है कि इससे वास्तविक मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं.

