श्रवण गर्ग | कॉकरोच जनता पार्टी एक्सपोज हो गई है, यह विपक्ष का हिस्सा नहीं
‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी एवं वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने 2 अक्टूबर को दिल्ली और मुंबई में हुए प्रदर्शनों, विपक्षी राजनीति के भीतर उभरते मतभेदों और आंदोलन की दिशा को लेकर विस्तार से चर्चा की. बातचीत में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारियों और कथित बदसलूकी की घटनाओं की तुलना मुंबई में हुए प्रदर्शन से की गई. श्रवण गर्ग ने इस अंतर को लेकर सवाल उठाए और आंदोलन से जुड़े विभिन्न राजनीतिक समूहों की भूमिका पर अपनी राय रखी.
गर्ग ने कहा कि मुंबई में प्रदर्शन अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा, जबकि दिल्ली में छात्र संगठनों, सिविल सोसाइटी और अन्य समूहों के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हुई. उन्होंने जंतर-मंतर पर नेहा बोरा समेत कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार का भी उल्लेख किया. उनके मुताबिक, आंदोलन की मांगों और उसमें शामिल विभिन्न समूहों के बीच राजनीतिक दूरी को समझना जरूरी है.
बातचीत का एक बड़ा हिस्सा एक संगठन को लेकर गर्ग की आलोचनात्मक व्याख्या पर केंद्रित रहा. उन्होंने आरोप लगाया कि यह संगठन विपक्षी आंदोलन का हिस्सा होने के बजाय अलग राजनीतिक दिशा में काम कर रहा है और इसके पीछे विभिन्न राजनीतिक ताकतों से संभावित संबंधों को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने विशेष रूप से इस बात को रेखांकित किया कि जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और मुंबई के प्रदर्शन के बीच दूरी क्यों दिखाई दी. यह उनका राजनीतिक आकलन था, जिसे उन्होंने आंदोलन की घटनाओं और सार्वजनिक गतिविधियों के आधार पर रखा.
गर्ग ने आंदोलन के नेतृत्व, उसके राजनीतिक श्रेय और विपक्षी एकजुटता को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अलग-अलग विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक साथ आने के बावजूद आंदोलन के भीतर पहल और नेतृत्व को लेकर प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है. उन्होंने राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों को भी इसी व्यापक संदर्भ में देखा.
चर्चा में पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और आंदोलनकारियों को अनुमति नहीं मिलने के सवाल भी उठे. गर्ग ने कहा कि अलग-अलग समूहों के प्रदर्शनों के साथ अलग व्यवहार होने के आरोप लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक निष्पक्षता से जुड़े सवाल पैदा करते हैं. उन्होंने अदालतों की भूमिका को लेकर भी असंतोष जताया और कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में संस्थाओं की भूमिका पर लगातार नजर रखी जा रही है.
बातचीत के अंतिम हिस्से में गर्ग ने सरकार की राजनीतिक स्थिति और विपक्षी आंदोलन के भविष्य को लेकर अपना आकलन रखा. उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम में कई स्तरों पर टकराव चल रहा है और आने वाले समय में इन आंदोलनों तथा विपक्षी रणनीति के असर को देखना महत्वपूर्ण होगा. वहीं, निधीश त्यागी ने बातचीत को नेहा बोरा और आंदोलन में शामिल युवाओं, पत्रकारों तथा बुद्धिजीवियों के साहस को समर्पित करते हुए समाप्त किया.
पूरी बातचीत हरकारा रोज़ाना के यूट्यूब चैनल पर सुन सकते हैं.

