भारत की खुदरा महंगाई जुलाई में बढ़कर 4.45%, लगातार दूसरे महीने आरबीआई के मध्य लक्ष्य से ऊपर
‘मिंट’ में सुभाष नारायण के मुताबिक, भारत की खुदरा महंगाई जुलाई में बढ़कर 4.45% हो गई. खाद्य और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई लगातार दूसरे महीने भारतीय रिजर्व बैंक के 4% के मध्य लक्ष्य से ऊपर रही. हालांकि यह अभी भी आरबीआई की 2% से 6% की सहनशीलता सीमा के भीतर है, लेकिन कीमतों में आगे बढ़ोतरी से आर्थिक वृद्धि और ब्याज दरों को लेकर दबाव बढ़ सकता है.
जुलाई की महंगाई 18 अर्थशास्त्रियों के अनुमान वाले 'मिंट' सर्वेक्षण के 4.4% के औसत अनुमान से भी थोड़ी अधिक रही. जनवरी 2025 के बाद यह दूसरी बार है जब खुदरा महंगाई लगातार दो महीनों तक आरबीआई के 4% मध्य लक्ष्य से ऊपर रही है.
खाद्य कीमतों का दबाव
खाद्य महंगाई जुलाई में बढ़कर 5.52% हो गई, जो जून में 5.32%, मई में 4.78% और अप्रैल में 4.20% थी. सब्जियों, खाद्य तेल और अन्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी ने महंगाई पर दबाव बढ़ाया.
जुलाई में प्याज, अदरक और लहसुन समेत कई सब्जियों तथा सोने, चांदी, हीरे और प्लैटिनम के आभूषणों में महंगाई का दबाव अधिक रहा. इसके विपरीत आलू, मटर, टमाटर, भिंडी तथा कार और जीप जैसी वस्तुओं में अखिल भारतीय स्तर पर महंगाई अपेक्षाकृत कम रही.
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के मुताबिक, मानसून और खेती के रकबे की स्थिति को देखते हुए आने वाले समय में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है. जुलाई में मानसून में सुधार हुआ है, लेकिन अत्यधिक बारिश से फसलों को नुकसान की खबरें भी सामने आई हैं. इससे खासकर दालों की कीमतों पर असर पड़ सकता है. वैश्विक स्तर पर खाद्य तेलों की ऊंची कीमतों का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ रहा है.
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने अगस्त में वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान 5.1% से घटाकर 5% किया था, लेकिन कमजोर मानसून, अल नीनो की आशंका, ऊर्जा की ऊंची और अस्थिर कीमतों तथा उत्पादन लागत बढ़ने से आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ने के जोखिम को लेकर चेतावनी दी थी.
तेल की कीमतों से बढ़ा जोखिम
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं. पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री परिवहन को लेकर चिंताओं के कारण इस महीने ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 7-8% बढ़कर 89 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई.
इसका असर परिवहन सेवाओं की महंगाई पर भी दिखा, जो जुलाई में बढ़कर 4.43% हो गई, जबकि जून में यह 4.31% थी. हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीद से आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है.
पश्चिम एशिया के संघर्ष ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है, जिससे रुपये में कमजोरी और मुद्रास्फीति के साथ धीमी वृद्धि यानी स्टैगफ्लेशन का जोखिम बढ़ा है. इसके बावजूद वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि 7.8% रही और पूरे वित्त वर्ष की वृद्धि दर 7.7% दर्ज की गई.
वित्त वर्ष 2027 में भारत की आर्थिक वृद्धि धीमी होकर 6.7% रहने का अनुमान है. आरबीआई ने जून में 6.6% और अप्रैल में 6.9% का अनुमान लगाया था. विश्व बैंक ने भी चालू वित्त वर्ष में 6.6% वृद्धि का अनुमान लगाया है, जबकि एशियाई विकास बैंक ने अपना अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है.
महंगाई मापने का नया आधार
मौजूदा महंगाई आंकड़ों की पिछले साल की समान अवधि से सीधी तुलना नहीं की जा सकती, क्योंकि जनवरी में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की नई श्रृंखला शुरू की गई थी. इसमें 2024 को आधार वर्ष बनाया गया है.
नई श्रृंखला में घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 में सामने आए खर्च के पैटर्न को शामिल किया गया है. इससे सूचकांक में वस्तुओं के भार में बदलाव आया है. मुख्य वस्तुओं का हिस्सा बढ़ा है, जबकि अस्थिर खाद्य कीमतों का भार घटा है. आवास को भी नए सूचकांक में अधिक महत्व दिया गया है.
जुलाई में आवास महंगाई 2.22% रही, जबकि जून में यह 2.10% थी.
नई श्रृंखला से नीति निर्माताओं को वास्तविक आय, खपत और लोगों की क्रय शक्ति का आकलन करने के लिए मौजूदा खर्च के पैटर्न पर आधारित आंकड़े मिल रहे हैं.
आरबीआई के सामने ब्याज दरों की चुनौती
आरबीआई ने 5 अगस्त को हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया. छह सदस्यीय समिति ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 5.25% पर बनाए रखने और तटस्थ रुख जारी रखने का फैसला किया. इसका संकेत है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल खाद्य और ईंधन की कीमतों पर नजर रखते हुए प्रतीक्षा और निगरानी की नीति अपना रहा है.
बैंक ऑफ बड़ौदा के मदन सबनवीस के मुताबिक, आने वाले समय में महंगाई पर ऊपर की ओर दबाव बना रह सकता है और एक ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना भी बनी हुई है. उनके अनुमान के अनुसार, इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में खुदरा महंगाई औसतन 4.5-4.7% रह सकती है और सितंबर में आधार प्रभाव कमजोर होने के कारण इसमें मामूली बढ़ोतरी संभव है.
इस तरह जुलाई की 4.45% खुदरा महंगाई आरबीआई के लक्ष्य के भीतर होने के बावजूद नीति निर्माताओं के लिए चेतावनी का संकेत है. खाद्य कीमतें, मानसून और कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे.

