'डाउन टू अर्थ' के मुताबिक, डिंडोरी के जंगलों में करीब 1.5 लाख साल के पेड़ प्रभावित हुए हैं. प्रभावित पेड़ों की कटाई जारी रहने के बावजूद नए इलाकों में कीटों का प्रकोप सामने आया है. ग्रामीणों को आशंका है कि इस बार स्थिति तीन दशक पहले हुए प्रकोप से भी गंभीर हो सकती है.
मध्य प्रदेश के डिंडोरी वन मंडल में साल बोरर कीटों का नया प्रकोप सामने आया है. यह स्थिति तब है, जब वन विभाग पिछले साल प्रभावित हुए हजारों पेड़ों की कटाई कर रहा है. करंजिया और बजाग वन परिक्षेत्रों में साल के पेड़ों के नीचे बड़ी मात्रा में बुरादा मिला है. इसे पेड़ों में कीटों की नई गतिविधि का संकेत माना जा रहा है. वन अधिकारियों और वैज्ञानिकों के अनुसार, यह प्रकोप लगभग हर 30 साल में दोहराने वाली समस्या हो सकती है.
वर्ष 2025 में वन विभाग ने करीब 1.5 लाख साल के पेड़ों को कीटों से प्रभावित पाया था. सितंबर में इन पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई थी. इसके बाद से अब तक 45 हजार से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं. काटे गए अधिकांश पेड़ अभी करंजिया वन परिक्षेत्र के अलग-अलग स्थानों पर पड़े हैं.
प्रभागीय वन अधिकारी (उत्पादन) भारती ठाकरे ने डाउन टू अर्थ को बताया कि पेड़ों की कटाई दिसंबर तक पूरी होने की उम्मीद है. हालांकि, अधिक प्रभावित क्षेत्रों में यह काम जनवरी या फरवरी तक जारी रह सकता है. काटी गई लकड़ी को रखने के लिए सागरटोला में अस्थायी डिपो बनाया गया है, जो प्रभावित क्षेत्र से करीब 60 किलोमीटर दूर है.
नए प्रकोप से बढ़ी चिंता
डिंडोरी वन मंडल के उपमंडल अधिकारी सुरेंद्र जाटव ने बताया कि कटाई वाले क्षेत्रों के दौरे के दौरान उन्हें साल बोरर कीटों की नई गतिविधियां दिखाई दीं. उन्होंने वन कर्मचारियों को सर्वेक्षण कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. इसके बाद वैज्ञानिक संस्थानों को भी इसकी जानकारी दी जाएगी.
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित पेड़ों को काटे जाने के बावजूद कीटों का प्रकोप फैल रहा है. सोंतिराथ गांव के 60 वर्षीय कार्तिक राम ने 1990 के दशक में साल बोरर का बड़ा प्रकोप देखा था. उनका मानना है कि मौजूदा स्थिति उस समय से भी अधिक गंभीर है.
उन्होंने बताया कि जुलाई से सितंबर के बीच जंगल के पास स्थित उनके घर की रोशनी की ओर बड़ी संख्या में कीट आकर्षित होते थे. कार्तिक राम को आशंका है कि साल के पेड़ों को लगातार हो रहे नुकसान से जंगल के जल स्रोतों और औषधीय पौधों पर भी असर पड़ सकता है.
कपोटी गांव के निवासी बुध सिंह पट्टा ने भी कहा कि आसपास के जंगलों में कीटों का प्रकोप काफी फैल चुका है. उनका आरोप है कि पिछले साल कटाई के लिए चिह्नित किए गए कई प्रभावित पेड़ों को नहीं काटा गया. उनके मुताबिक, इससे कीटों का फैलाव बढ़ा हो सकता है.
कटाई के दौरान स्वस्थ पेड़ों को नुकसान की शिकायत
सोंतिराथ गांव के निवासी हीराभाई ने बताया कि उनके गांव के पास वन क्षेत्र के 76 से 79 नंबर कंपार्टमेंट में 5,000 से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं. उनके अनुसार, प्रत्येक कंपार्टमेंट में 15 हजार से 20 हजार पेड़ों को काटने की योजना है.
उन्होंने यह भी चिंता जताई कि प्रभावित पेड़ों को काटते समय उनके गिरने से आसपास के स्वस्थ पेड़ भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं.
27 और 28 अक्टूबर को प्रभावित क्षेत्रों के दौरे के दौरान डाउन टू अर्थ ने कई ग्रामीणों से बातचीत की. उनका कहना था कि इस बार कीटों का प्रकोप पिछले साल की तुलना में अधिक गंभीर दिखाई दे रहा है. कुछ ग्रामीणों ने इसकी तुलना करीब तीन दशक पहले हुए बड़े प्रकोप से भी की.
वन विभाग ने नए सिरे से सर्वेक्षण के निर्देश दिए हैं, लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ताजा प्रकोप से कुल कितने पेड़ प्रभावित हुए हैं. ग्रामीणों को आशंका है कि पेड़ों का बड़े पैमाने पर नुकसान जंगल के संसाधनों को प्रभावित कर सकता है. वहीं, कटाई के दौरान स्वस्थ पेड़ों को नुकसान पहुंचने की शिकायतों ने भी चिंता बढ़ाई है.

