'आर्टिकल 14' में सूचक पटेल ने लिखा है कि नीट पेपर लीक के खिलाफ देशव्यापी छात्र प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था. इसके बावजूद, सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी से पता चलता है कि 2024 के कानून के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए कई परीक्षा एजेंसियों ने अब तक आवश्यक व्यवस्था नहीं बनाई है. इस कानून के तहत दर्ज 29 मामलों की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है. इसके बावजूद, सरकार अब एक नया कानून लाने की तैयारी कर रही है.
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) 2026 का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद देशभर में छात्रों ने प्रदर्शन किया. इन प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. सरकार ने इसके जवाब में अधिक सख्त कानून लाने का प्रस्ताव रखा है, लेकिन पहले से लागू कानून के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
'आर्टिकल 14' द्वारा दायर नौ आरटीआई आवेदनों से पता चला कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत अनिवार्य निगरानी तंत्र अब तक स्थापित नहीं किया है. राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने अपने पास एक समिति होने की जानकारी दी, लेकिन उसके कामकाज का विवरण साझा नहीं किया. कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) और इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन (आईबीपीएस) ने जानकारी देने से इनकार कर दिया.
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने पहले कहा कि उसके पास इस कानून के तहत दर्ज मामलों की जानकारी नहीं है. हालांकि, पहली अपील के बाद विभाग ने स्वीकार किया कि इस कानून के तहत 29 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं.
निगरानी तंत्र पर एजेंसियों के जवाब
2024 के कानून के नियम 9 के अनुसार, प्रत्येक सार्वजनिक परीक्षा प्राधिकरण को कानून के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक तंत्र स्थापित करना अनिवार्य है. इसके बावजूद, यूपीएससी ने 31 जुलाई 2026 को आरटीआई के जवाब में कहा कि इस संबंध में निर्णय अभी विचाराधीन है और कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. आयोग ने इस विषय पर भेजे गए अतिरिक्त सवालों का भी जवाब नहीं दिया.
आईबीपीएस ने यह कहते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया कि वह सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के दायरे में नहीं आता. हालांकि, 2024 के कानून की अनुसूची में आईबीपीएस को सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था के रूप में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है. वर्ष 2010 में केंद्रीय सूचना आयोग ने भी आईबीपीएस को जन सूचना अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया था, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने बाद में उस आदेश को रद्द कर दिया.
एनटीए ने बताया कि उसके पास अनुचित साधन (यूएफएम) समिति है, जो परीक्षा में गड़बड़ी के मामलों की जांच कर कार्रवाई की सिफारिश करती है. हालांकि, एजेंसी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कानून के क्रियान्वयन की निगरानी कैसे की जाती है. उसने मांगी गई जानकारी निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध न होने और जांच जारी रहने का हवाला देकर कुछ दस्तावेज साझा करने से भी इनकार कर दिया.
आरआरबी और एसएससी ने भी नहीं दी स्पष्ट जानकारी
वर्ष 2024 में रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) की परीक्षाओं में 3.58 करोड़ से अधिक परीक्षार्थी शामिल हुए थे. निगरानी तंत्र के बारे में पूछे जाने पर अहमदाबाद आरआरबी ने केवल इतना कहा कि जरूरत पड़ने पर कानून के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाती है. हालांकि, उसके जवाब से यह स्पष्ट नहीं हुआ कि वहां कोई स्थायी निगरानी व्यवस्था मौजूद है या नहीं.
वहीं, एसएससी ने जानकारी देने से इनकार करते हुए कहा कि इससे भविष्य की परीक्षाओं की सुरक्षा और निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है. वर्ष 2024-25 में एसएससी की 20 परीक्षाओं के विभिन्न चरणों के लिए दो करोड़ से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया था या अगले चरणों के लिए पात्रता हासिल की थी.
29 प्राथमिकी, लेकिन जांच की स्थिति अस्पष्ट
आरटीआई के जवाब में डीओपीटी ने पहले कहा था कि उसके पास इस कानून के तहत दर्ज मामलों की जानकारी नहीं है. लेकिन पहली अपील के बाद विभाग ने बताया कि कुल 29 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं. इन मामलों का विवरण और जांच की स्थिति पूछने पर भी विभाग ने कोई जवाब नहीं दिया. केवल यूपीएससी ने एक मामले की जानकारी साझा की. अहमदाबाद आरआरबी ने कहा कि उसके यहां कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई, जबकि अन्य एजेंसियों ने इससे संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई.
नया विधेयक और पुराने कानून पर सवाल
सरकार सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 के जरिए कड़ी सजा, विशेष कार्यबल, फास्ट ट्रैक अदालतों और जांच एवं सुनवाई के लिए समय-सीमा तय करने का प्रस्ताव कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने वाला कदम बताया है, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया है.
इसके अलावा, सरकार ने 2027 से नीट-यूजी को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित परीक्षा के रूप में आयोजित करने की घोषणा की है. हालांकि, इसके लिए आवश्यक दिशानिर्देशों और परामर्श प्रक्रिया की स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है. राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी (एनआरए) ने इस संबंध में एक मार्गदर्शन नोट जारी किया, लेकिन परामर्श प्रक्रिया का विवरण साझा नहीं किया.
'आर्टिकल 14' की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपीएससी, आईबीपीएस, एनटीए, आरआरबी और एसएससी से मिले जवाबों में 2024 के कानून के अनुपालन का स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला है. प्रश्नपत्र लीक के मामलों की जांच, निगरानी और अभियोजन से जुड़े आंकड़े भी सार्वजनिक नहीं हैं. ऐसे में, नए कानून के प्रस्ताव के बीच पहले से लागू कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं.

