राम मंदिर ‘चढ़ावा चोरी’: फुटेज में 5 मुख्य आरोपी नकदी के बंडल हटाते और छुपाते दिखे
अयोध्या के राम मंदिर से बरामद सीसीटीवी फुटेज में चढ़ावा/दान राशि की कथित चोरी के आरोप में गिरफ्तार आठ लोगों में से कम से कम प्राप्त पांच लोग नोटों की गिनती के दौरान नकदी हटाते और छुपाते हुए दिखाई दे रहे हैं.
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में दीप्तिमान तिवारी की रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर के तीर्थयात्री सुविधा केंद्र के 45 दिनों के फुटेज की गहन जांच से पता चला है कि गिनती करने वाले पांच कर्मी नोटों के बंडल हटाकर उन्हें अपने कपड़ों या मोजों में छुपा रहे थे.
इस बीच, जिस एजेंसी के माध्यम से इन कर्मियों को काम पर रखा गया था, उसने दावा किया है कि उसने इन लोगों की तलाश खुद नहीं की थी, बल्कि इन नामों की सिफारिश भारतीय स्टेट बैंक द्वारा की गई थी, जहां दान का पैसा जमा किया जाता था. पुलिस ने दान का पैसा हटाते हुए दिखे आरोपियों से जुड़े परिसरों की तलाशी ले ली है और नकदी बरामद की है. पुलिस अब तक करीब 80 लाख रुपये बरामद कर चुकी है. ट्रस्ट ने मंदिर की विभिन्न हुंडियों (दानपात्रों) में डाले गए नोटों और सिक्कों की गिनती के लिए लगभग 50 लोगों को लगाया था.
एक अधिकारी ने कहा, “गिनती के दौरान, पांच लोगों को नोटों के ढेर से बंडल निकालते, उन्हें अपने कपड़ों में छुपाते या मोजों में ठूंसते हुए देखा जा सकता है. इन व्यक्तियों से जुड़े परिसरों की तलाशी में पहले ही नकदी बरामद हो चुकी है. दुर्भाग्य से, मंदिर में 45 दिनों से अधिक का सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित नहीं रहता है. इसलिए हम निश्चितता के साथ यह नहीं कह सकते कि यह चोरी कब से चल रही थी.” पुलिस अब आरोपियों से जुड़े परिसरों से बरामद दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि चोरी के पैसों से कोई संपत्ति या एसेट अर्जित की गई थी या नहीं.
“हम उन विभिन्न अन्य तरीकों की भी जांच कर रहे हैं जिनसे मंदिर से दान का पैसा चुराया गया था. यहां तक कि बैंक के कर्मचारी भी जांच के दायरे में हैं,” अधिकारी ने कहा.
इस मामले में गिरफ्तार आठ लोगों में से छह को भारतीय स्टेट बैंक द्वारा वाराणसी की एक मैनपावर एजेंसी 'सैनिक सिक्योरिटीज' के माध्यम से गिनती के काम के लिए रखा गया था. सैनिक सिक्योरिटीज के निदेशक गौरव सिंह ने कहा कि उनकी एजेंसी बैंकों और अन्य फर्मों को हाउसकीपिंग स्टाफ (सफाई और रखरखाव कर्मी) उपलब्ध कराती है.
उन्होंने कहा, “हम बैंकिंग से संबंधित मैनपावर नहीं, बल्कि हाउसकीपिंग स्टाफ प्रदान करते हैं. बैंक या फर्म उस स्टाफ का उपयोग किस काम के लिए करती है, यह उन पर निर्भर करता है.”
उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए की गई भर्ती में एजेंसी को अपनी पसंद से लोग चुनने की आजादी नहीं थी. सिंह ने कहा, “इस मामले में, एसबीआई ने हमें उन लोगों के नाम दिए थे जिन्हें काम पर रखा जाना था. हमने उनके आधार कार्ड की जांच करके उनके दस्तावेजों का सत्यापन (वेरिफिकेशन) किया और कागजी कार्रवाई पूरी की. इन लोगों ने पहले कभी हमारे साथ काम नहीं किया था.”
इसकी पुष्टि करते हुए एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “इससे साफ पता चलता है कि मंदिर का प्रबंधन तदर्थवाद के भरोसे चल रहा था. एसआईटी की रिपोर्ट में भी इस बात का जिक्र किया गया है. कई आरोपी आपस में या किसी ट्रस्ट पदाधिकारी के रिश्तेदार हैं. आरोपियों के अलावा नोटों की गिनती के लिए नियुक्त बड़ी संख्या में लोगों को भी तदर्थ आधार पर रखा गया था, क्योंकि कोई न कोई किसी का परिचित था. भर्ती से पहले व्यक्तियों की उचित जांच नहीं की गई थी, और न ही गिनती केंद्र पर सुरक्षा जांच और तलाशी के कड़े नियम थे.” अधिकारी ने कहा कि बैंक अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं.

