मोदी सरकार ने 5 वर्षों में प्रिंट विज्ञापनों पर ₹910 करोड़ खर्च किए; टीवी को भी जोड़ लें तो रोज़ाना 1.5 करोड़
लोकसभा में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, नरेंद्र मोदी सरकार ने 2020-21 और 2024-25 के बीच प्रिंट मीडिया विज्ञापनों पर 910.4 करोड़ रुपये खर्च किए. यह आंकड़े कांग्रेस सांसद राधाकृष्ण के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में प्रस्तुत किए गए.
‘न्यूज़ लॉन्ड्री’ के अनुसार, समाचार पत्रों में, 'टाइम्स ऑफ इंडिया' को पांच साल की अवधि के दौरान सरकारी प्रिंट विज्ञापनों में सबसे अधिक 78.22 करोड़ रुपये मिले, इसके बाद 'दैनिक जागरण' को 59.14 करोड़ रुपये और 'हिंदुस्तान टाइम्स' को 47.80 करोड़ रुपये प्राप्त हुए.
अन्य प्रमुख लाभार्थियों में 'अमर उजाला' (24.92 करोड़ रुपये), 'हिंदुस्तान' (21.56 करोड़ रुपये) और 'दैनिक भास्कर' (20.53 करोड़ रुपये) शामिल थे. 'द इंडियन एक्सप्रेस' को 6.51 करोड़ रुपये मिले.
इसके पहले संसद में एक सवाल के उत्तर में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने कहा था कि उसने 2014-15 से 2024-25 तक के 11 वित्तीय वर्षों में विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्मों पर विज्ञापनों पर कुल 5,987.46 करोड़ रुपये खर्च किए. इस अवधि के दौरान विज्ञापनों पर यह खर्च औसतन लगभग 1.5 करोड़ रुपये प्रति दिन बैठता है. आंकड़ों से यह भी पता चला कि 2024 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले विज्ञापन खर्च में तेज वृद्धि हुई थी. आम चुनाव से ठीक पहले के वित्तीय वर्ष 2023-24 में सरकार ने विज्ञापनों पर 353.98 करोड़ रुपये खर्च किए. वहीं 2024-25 में यह खर्च 323.41 करोड़ रुपये रहा.

