श्रवण गर्ग | टाइगर हो या नहीं हो परिसीमन बिल जिंदा है

संसद का मानसून सत्र तीन हफ्ते बीतने के बाद भी उस कामकाज तक नहीं पहुंच पाया, जिसकी उम्मीद की जा रही थी. विपक्ष लगातार गृह मंत्री अमित शाह के सदन में आकर 20 जुलाई को बिहार में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर जवाब देने की मांग कर रहा है. इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की सदन में गैरमौजूदगी ने सोमवार से शुरू होने वाले आखिरी तीन दिनों को लेकर सियासी अटकलें तेज कर दी हैं.

‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी से बात करते हुए श्रवण गर्ग ने मौजूदा स्थिति को एक फिल्म के क्लाइमेक्स से जोड़ते हुए कहा कि पिछले तीन हफ्ते इंटरवल की तरह रहे, लेकिन अब कहानी निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकती है. उनके मुताबिक, "क्लाइमेक्स आ रहा है. आप होल्ड योर ब्रेथ."

इस सस्पेंस को कांग्रेस के उस व्हिप ने और बढ़ा दिया है, जिसमें सांसदों को 11, 12 और 13 अगस्त को पूरे समय सदन में मौजूद रहने को कहा गया है. सवाल यह है कि क्या विपक्ष इस बार सदन को चलने देगा या सरकार की ओर से कोई बड़ा विधायी कदम आने वाला है.

श्रवण गर्ग के मुताबिक, सबसे बड़ा सवाल परिसीमन विधेयक को लेकर है. क्या सरकार ने इसे फिलहाल रोक दिया है या सोमवार से इसे लेकर कोई बड़ा फैसला सामने आएगा? महिला आरक्षण कानून को परिसीमन से जोड़ने की सरकार की कोशिश भी बातचीत का हिस्सा बनी है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और राहुल गांधी के बीच हुई मुलाकात को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है.

इसी बीच अमित शाह की लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से करीब एक घंटे की मुलाकात और उसके बाद उनका मुंबई जाना भी सवाल खड़े कर रहा है. मुंबई में उनके निर्धारित कार्यक्रमों के अलावा राजनीतिक मुलाकातों की अटकलें भी लगाई जा रही हैं. विपक्षी दलों, खासकर महाराष्ट्र और तमिलनाडु के सहयोगियों के रुख को लेकर भी सरकार की रणनीति पर नजर है.

श्रवण गर्ग का सबसे बड़ा दावा परिसीमन विधेयक के महत्व को लेकर है. उनका कहना है कि यह सिर्फ महिला आरक्षण का सवाल नहीं है, बल्कि सत्ता के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है. उन्होंने इसे "अमित शाह आरक्षण" तक कहा और दावा किया कि इस विधेयक का भाजपा की भविष्य की सत्ता-रणनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है.

हालांकि, ये सभी संभावनाएं और राजनीतिक कयास हैं. वास्तविक तस्वीर सोमवार से साफ होगी. क्या अमित शाह सदन में आएंगे? क्या प्रधानमंत्री भी मौजूद रहेंगे? क्या कोई बड़ा विधेयक अचानक पेश होगा? या फिर संसद एक बार फिर हंगामे और स्थगन के बीच फंस जाएगी?

फिलहाल इतना तय है कि तीन हफ्तों के बाद संसद के आखिरी तीन दिन सामान्य नहीं दिख रहे. जैसा श्रवण गर्ग ने कहा, "परिसीमन बिल जिंदा है." अब देखना यही है कि सोमवार को इस राजनीतिक फिल्म का क्लाइमेक्स क्या होता है. पूरी बातचीत यहां सुन सकते हैं.

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