‘ऑपरेशन टाइगर’: शिवसेना (यूबीटी) का दावा- सांसदों को दिया गया ₹50 करोड़ का ऑफर वे कहाँ हैं कुछ पता नहीं
महाराष्ट्र से स्नेहल मुथा की खबर है कि शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों—संजय दीना पाटिल, संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और ओमराजे निंबालकर—के पार्टी छोड़ने की अटकलें हैं. ये सांसद उद्धव ठाकरे के आवास पर हुई बैठक से भी नदारद रहे, जिसके बाद पार्टी ने 18 जून को अपने संसदीय बोर्ड की आपात बैठक बुलाई है.
'ऑपरेशन टाइगर' और खरीद-फरोख्त के आरोप
नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने 'ऑपरेशन टाइगर' का जिक्र करते हुए सनसनीखेज आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र के सांसदों को ₹50-50 करोड़ का ऑफर दिया जा रहा है, जिसमें से ₹15 करोड़ एडवांस मिलने के बाद ही नेता चार्टर्ड प्लेन से दिल्ली रवाना हुए. राउत ने कहा कि ये सभी सांसद बाल ठाकरे के नाम और उद्धव ठाकरे की मेहनत की बदौलत जीते हैं, और महाराष्ट्र की जनता इन 'गद्दारों' को माफ नहीं करेगी. पार्टी नेता सुषमा अंधारे ने भी दावा किया कि शिंदे गुट के नेता इन सांसदों को अपने साथ दिल्ली ले गए हैं.
दबाव की राजनीति
संजय राउत ने आरोप लगाया कि सत्तापक्ष सांसदों को डराने के लिए कानूनी और केंद्रीय एजेंसियों का सहारा ले रहा है. उन्होंने सांसद ओमराजे निंबालकर का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें उनके पिता की हत्या के मामले में आने वाले अदालती फैसले की धमकी देकर साथ आने के लिए मजबूर किया गया.
दरअसल, 2022 की बगावत से सबक लेते हुए शिवसेना (यूबीटी) इस बार अत्यधिक सावधानी बरत रही है. लोकसभा में पार्टी नेता अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर मांग की है कि संसद में उनके गुट को ही आधिकारिक मान्यता दी जाए. पत्र में वर्ष 2003 के 91वें संविधान संशोधन का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया कि अब कानूनन पार्टी में 'फूट' (स्प्लिट) को मान्यता नहीं दी जा सकती; केवल दसवीं अनुसूची के तहत पूरी पार्टी का 'विलय' ही एकमात्र अपवाद है. इसलिए अध्यक्ष किसी भी विद्रोही गुट को अलग मान्यता या विशेषाधिकार न दें.

