बीजेपी आईटी सेल; बड़ा पद पाने में बाधा नहीं बनीं विवादित और सांप्रदायिक पोस्टें, 60,000 से ज्यादा पोस्ट हटाईं

‘ऑल्ट न्यूज़’ में अभिषेक कुमार की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी द्वारा 17 अगस्त को अपने सोशल मीडिया सेल में नए बदलावों की घोषणा की गई, जिसके तहत दीपक म्हस्के को अमित मालवीय की जगह आईटी सेल प्रमुख बनाया गया. इस नई टीम में अरुण यादव को राष्ट्रीय सोशल मीडिया सह-संयोजक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई. इससे पहले वे हरियाणा बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख रह चुके थे.

राष्ट्रीय स्तर पर नियुक्ति मिलते ही अरुण यादव के पुराने सोशल मीडिया रिकॉर्ड की ओर लोगों और मीडिया का ध्यान आकर्षित हुआ. इसके तुरंत बाद यादव ने अपने ‘एक्स’ हैंडल (@BeingArun28) को प्राइवेट (लॉक) कर दिया. उस समय उनके अकाउंट पर लगभग 65,500 पोस्ट दिखाई दे रही थीं.

अकाउंट को लॉक रखकर उन्होंने 60,000 से अधिक पोस्ट डिलीट कर दिए. 22 अगस्त तक उनके अकाउंट पर केवल 2,794 पोस्ट ही बचे थे. वर्तमान में

उनकी टाइमलाइन पर सबसे पुराना उपलब्ध पोस्ट 19 अगस्त 2026 का है. इस तरह उन्होंने अपने पिछले पूरे पोस्टिंग इतिहास को सार्वजनिक नजरों से पूरी तरह मिटा दिया.

2022 में पद से हटाने की पृष्ठभूमि

अरुण यादव का विवादित टिप्पणियों का इतिहास काफी पुराना रहा है. उन्हें 8 जुलाई 2022 को हरियाणा बीजेपी आईटी सेल प्रमुख के पद से हटा दिया गया था.

वर्ष 2017 में यादव ने मक्का स्थित काबा की एक तस्वीर के साथ व्हिस्की के गिलास का चित्र साझा करते हुए एक आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसे लेकर लगातार सवाल उठते रहे थे.

यह कार्रवाई ठीक उस समय हुई जब बीजेपी की तत्कालीन राष्ट्रीय प्रवक्ता

नूपुर शर्मा द्वारा पैगंबर मोहम्मद पर की गई टिप्पणी के कारण भारत और

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी विवाद पैदा हो गया था. अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच पार्टी ने नूपुर शर्मा को निष्कासित कर दिया था. इसके अगले ही महीने यादव का 2017 का आपत्तिजनक पोस्ट फिर से वायरल होने लगा. संवेदनशील माहौल को देखते हुए बीजेपी ने यादव को पद से हटा दिया, जो एक तरह से इस बात की मौन स्वीकारोक्ति थी कि उनकी पोस्ट पार्टी की नीतियों के खिलाफ थी.

विवादित पोस्टों का पैटर्न

यादव की पिछली सोशल मीडिया गतिविधियों की समीक्षा से यह स्पष्ट होता है

कि वे कई संवेदनशील मामलों पर अभद्र, सांप्रदायिक और अपमानजनक बयानों

में शामिल रहे हैं.

ज्ञानवापी विवाद पर टिप्पणी (मई 2022): ज्ञानवापी मस्जिद मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उन्होंने लिखा, "जब तक खुदा भारत नहीं छोड़ देते, तब तक खुदाई जारी रहेगी, खुदाई जारी रखो." यह बयान केवल एक भड़काऊ टिप्पणी नहीं था, बल्कि मस्जिदों की जगह पर खुदाई को एक अभियान के रूप में पेश करने की कोशिश थी.

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, "वह किस तरह का अज्ञानी समुदाय होगा जिनका अल्लाह दूसरों से चुराए और लूटे गए मंदिरों में रहता है?" यह पूरे मुस्लिम समुदाय पर किया गया एक सीधा हमला था. मई 2022 में मस्जिदों के सर्वेक्षण का विरोध कर रही मुस्लिम महिलाओं के संदर्भ में "हलाला" शब्द का उपयोग करते हुए उन्होंने अत्यंत अश्लील और अपमानजनक टिप्पणी की.

दिल्ली दंगे के मामले में यूएपीए के तहत जेल में बंद गर्भवती छात्रा सफूरा ज़रगर की स्थिति का मजाक उड़ाते हुए उन्होंने लिखा, "500 रुपये में 9 महीने का रिचार्ज किसे मिला?" उन्होंने इस पोस्ट के नीचे आई अन्य अभद्र टिप्पणियों का भी समर्थन किया था.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक वीडियो पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने उनके लिए "ब्राउन आंटी की फसल" वाक्यांश का इस्तेमाल किया, जो सोनिया गांधी के इतालवी मूल पर किया गया एक नस्लवादी और व्यक्तिगत हमला था.

बीजेपी की आईटी सेल पर लंबे समय से नफरत फैलाने, ट्रोलिंग करने और भ्रामक जानकारी के प्रसार के आरोप लगते रहे हैं. भारत के प्रमुख राजनीतिक सोशल मीडिया तंत्र का हिस्सा होने के नाते यह जनता तक पहुँचने वाली जानकारी को प्रभावित करने में बड़ी भूमिका निभाता है.

ऐसे में अरुण यादव की पदोन्नति यह राजनीतिक संदेश देती है कि जिस सांप्रदायिक और अमर्यादित आचरण के लिए पार्टी ने एक बार उन्हें बर्खास्त किया था, वह बाद में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा पद पाने के रास्ते में बाधा नहीं बना.

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