कर्नाटक: नाम हटाने के लिए थोक में ‘फॉर्म-7’ दाखिल करने पर बवाल, चुनाव आयोग से जांच की मांग

‘द हिंदू’ ब्यूरो के अनुसार, कर्नाटक में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए थोक में 'फॉर्म-7' जमा करने पर सियासत गरमा गई है. मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने सुनियोजित तरीके से अल्पसंख्यकों, दलितों, पिछड़ों और झुग्गीवासियों के नाम हटाने की आपराधिक साजिश रची है. इस मामले में पुलिस ने बेलगावी और भालकी में तीन एफआईआर दर्ज की हैं.

बेंगलुरु में कैबिनेट मंत्रियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए मुख्यमंत्री ने भारत निर्वाचन आयोग से सभी प्रभावित निर्वाचन क्षेत्रों में गहन जांच की मांग की. उन्होंने डेटा लीक और प्री-प्रिंटेड फॉर्म का आरोप लगाया. कहा कि फॉर्म-7 में मतदाताओं के नाम पहले से छपे हुए थे और केवल आवेदक का नाम हाथ से भरना था. उन्होंने मतदाता डेटा संभालने वाली एजेंसी का भाजपा से संबंध होने और डेटा लीक का आरोप लगाते हुए ऑडिट की मांग की. उन्होंने कहा कि बेलगावी में एक भाजपा कार्यकर्ता के नाम से 198 फॉर्म भरे गए, जिसने खुद हस्ताक्षर फर्जी होने की बात कही. उनका कहना था कि दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी के बाद कई भाजपा कार्यकर्ताओं ने लिखित माफी मांगकर आवेदन वापस लिए. विजयपुरा जिले से आने वाले भारी एवं मध्यम उद्योग मंत्री एम. बी. पाटिल ने कहा, "विजयपुरा शहर में, सात भाजपा कार्यकर्ताओं ने दो दिनों में 13,000 से अधिक मतदाताओं—जिनमें से अधिकांश मुस्लिम थे—के नाम हटाने के लिए थोक में फॉर्म-7 दाखिल किए. फॉर्म में नाम हटाने के लिए बताए गए आधारों के झूठा पाए जाने पर कार्रवाई की चेतावनी मिलने के बाद, उन्होंने आवेदन वापस ले लिए और लिखित में दिया. 2023 में इस निर्वाचन क्षेत्र में जीत का अंतर लगभग 6,000 वोटों का था. इसलिए, 13,000 मतदाताओं का नाम हटना चुनाव का परिणाम बदल सकता है."

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संदिग्ध या अवैध रूप से जुड़े मतदाताओं को चिह्नित करना पार्टी का अधिकार है. उन्होंने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को सूची में शामिल किया गया है. चुनाव आयोग आवेदनों की जांच कर सही निर्णय लेगा, इसमें कोई अपराध नहीं हुआ है और भाजपा एफआईआर से पीछे नहीं हटेगी.

Previous
Previous

‘यह अपहरण जैसा था’: भारतीय दस्तावेज होने के बावजूद 87 दिन जेल में रहे बंगाली मुस्लिम जलिल अख्तर

Next
Next

1.56 अरब हेक्टेयर भूमि क्षरित, दुनिया की कुल भूमि का 10% और भारत के क्षेत्रफल से करीब 5.2 गुना: संयुक्त राष्ट्र