एसआईआर: तेलंगाना में थोक में फॉर्म-7 आवेदन दाखिल करने पर भाजपा बूथ एजेंट के खिलाफ मामला दर्ज
‘साउथ फर्स्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, तेलंगाना पुलिस ने मुशीराबाद विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए 30 से अधिक फॉर्म-7 आवेदन जमा करने के आरोप में भाजपा के बूथ-लेवल एजेंट एस. बालचंदर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. इन आवेदनों में जिन मतदाताओं के नाम दिए गए थे, वे सभी मुस्लिम हैं. इनमें कांग्रेस के बूथ-लेवल एजेंट शफीउद्दीन और उनके परिवार के सदस्य भी शामिल हैं.
एफआईआर मुशीराबाद के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी प्रवीण कुमार रेड्डी की शिकायत पर चिक्कड़पल्ली पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई. पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच जारी है. बालचंदर पर भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है.
यह कार्रवाई तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सी. सुधर्शन रेड्डी के उस निर्देश के एक दिन बाद हुई, जिसमें उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान फॉर्म-6, 6ए, 7 और 8 में जानबूझकर गलत बयान या घोषणा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया था. मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय को बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन जमा किए जाने और इनमें से कुछ के वास्तविक न होने की शिकायतें मिली थीं.
फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज करने या किसी मतदाता का नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है. कांग्रेस ने 1 अक्टूबर को मुशीराबाद में आरोप लगाया था कि भाजपा के एक बूथ एजेंट ने मुस्लिम परिवार के सदस्यों के नाम हटाने के लिए 30 से अधिक आवेदन जमा किए हैं. बाद में बहादुरपुरा और गोशामहल में भी ऐसे आवेदन मिलने की बात कही गई.
‘द साउथ फर्स्ट’ द्वारा देखे गए एक फॉर्म-7 आवेदन में मतदाता का नाम और पता पहले से भरा हुआ था, जबकि आवेदन जमा करने वाले व्यक्ति की जानकारी खाली थी.
इस बीच, तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने हैदराबाद के पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार को शिकायत देकर बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन जमा करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी. कांग्रेस ने ऐसे मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने की मांग भी की.
5 अक्टूबर को जारी ज्ञापन में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई का निर्देश दिया. यह धारा चुनाव संबंधी आवेदन में जानबूझकर गलत बयान या घोषणा करने से संबंधित है.
मुशीराबाद में एफआईआर ऐसे समय दर्ज हुई है, जब विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन दाखिल किए जाने को लेकर विवाद बढ़ रहा है. मामले की जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि ये आवेदन किन परिस्थितियों में और किस उद्देश्य से दाखिल किए गए थे.

