चुनावों के दौरान दिल्ली के इस मतदान केंद्र पर 729 मतदाता थे; एसआईआर के बाद, अब केवल ‘एक’ बचा है

श्रावस्ती दासगुप्ता की यह रिपोर्ट दिल्ली के चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की घटना पर प्रकाश डालती है.

रिपोर्ट के अनुसार, लाल किला यमुना ब्रिज मतदान केंद्र (भाग 33) में एसआईआर प्रक्रिया से पहले 729 मतदाता पंजीकृत थे. हालांकि, 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में इनमें से 728 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए और केवल 1 मतदाता ही सूची में शेष बचा.

पिछले तीन दशकों से बीजेपी की बूथ स्तर की एजेंट (बीएलए) रहीं 74 वर्षीय गायत्री देवी का नाम भी 'स्थायी रूप से स्थानांतरित' बताकर सूची से हटा दिया गया है, जबकि वे वर्षों से वहीं रह रही हैं और उन्होंने 2025 के दिल्ली चुनाव में मतदान भी किया था. गायत्री देवी ने कहा, “मैंने अपना पूरा जीवन यहीं बिताया है, मेरे पास आधार, राशन कार्ड, स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र, भूमि दस्तावेज सब कुछ हैं. मेरे माता-पिता स्वतंत्रता सेनानी थे और मेरी मां को इंदिरा गांधी सरकार के दौरान स्वतंत्रता सेनानी पेंशन मिलती थी, मेरे पास वे कागजात भी हैं. फिर भी अब मुझे हटा दिया गया है. क्या वे अब हमें घुसपैठिया कहेंगे?” इसी तरह 39 वर्षीय कमल लाल, जिन्होंने सैकड़ों फॉर्म भरने में मदद की थी, का नाम भी हटा दिया गया.

सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) के रिकॉर्ड के अनुसार, 729 मतदाताओं में से 632 स्थानांतरित, 42 मृत, 10 डुप्लिकेट, 1 अनुपस्थित और 43 अन्य कारणों से हटाए गए. अधिकारियों का तर्क है कि 2023 में इलाके में हुई तोड़फोड़ (डिमोलिशन) के कारण ऐसा हुआ है.

अधिकारियों और दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, यह केवल एक ड्राफ्ट सूची है.  जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, वे निवास का प्रमाण (जैसे किरायानामा, बिजली-पानी का बिल) प्रस्तुत करके फॉर्म 6 या फॉर्म 8 के माध्यम से अंतिम सूची में अपना नाम फिर से जुड़वा सकते हैं.

पारदर्शिता कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और 'वोटर अधिकार मंच' ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. उनके विश्लेषण के अनुसार, एसआईआर शुरू होने से पहले ही दिल्ली में लगभग 11 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए थे. उन्होंने चिंता जताई कि झुग्गी-झोपड़ियों और बेघर गरीबों के पास औपचारिक दस्तावेज न होने के कारण वे अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं.

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