झारखंड की सरकारी भर्ती परीक्षा में 75 फीसदी अभ्यर्थी नहीं दे सके परीक्षा, कई ने देर से मिले ईमेल और दूरस्थ परीक्षा केंद्रों को ठहराया जिम्मेदार

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की फील्ड वर्कर भर्ती परीक्षा में लगभग 75 फीसदी अभ्यर्थी शामिल नहीं हो सके. उम्मीदवारों का आरोप है कि उन्हें एडमिट कार्ड जारी होने की सूचना समय पर नहीं मिली और कई लोगों को घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए, जिसके कारण वे परीक्षा देने से वंचित रह गए.

‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, 19 जुलाई को आयोजित यह परीक्षा वर्ष 2024 में विज्ञापित 510 फील्ड वर्कर पदों के लिए हुई थी. भर्ती विज्ञापन जारी होने के लगभग दो वर्ष बाद आयोजित इस परीक्षा के लिए 3,22,867 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था. इनमें से केवल 86,444 उम्मीदवार ही परीक्षा में शामिल हुए. यानी करीब 26 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी, जबकि लगभग 74 प्रतिशत उम्मीदवार अनुपस्थित रहे.

झारखंड और बिहार के कई अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि उन्हें एडमिट कार्ड जारी होने की जानकारी देने वाला ईमेल या तो परीक्षा के बाद मिला या बिल्कुल नहीं मिला. हालांकि, आयोग का कहना है कि परीक्षा से जुड़ी सभी जानकारियां समय रहते उसकी वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी गई थीं.

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले की 26 वर्षीय लिपिका महापात्रा को हजारीबाग में परीक्षा केंद्र मिला था, जो उनके घर से 300 किलोमीटर से अधिक दूर था. उन्होंने बताया कि परीक्षा से महज चार दिन पहले उन्हें इसकी जानकारी मिली. इतने कम समय में यात्रा और ठहरने की व्यवस्था करना उनके लिए संभव नहीं था. लिपिका का दावा है कि एडमिट कार्ड जारी होने का ईमेल उन्हें परीक्षा के अगले दिन प्राप्त हुआ. उन्होंने कहा कि उन्होंने इस भर्ती परीक्षा की अच्छी तैयारी की थी और परीक्षा छूटने से उनके हाथ से एक बड़ा अवसर निकल गया.

550 किलोमीटर दूर मिला परीक्षा केंद्र.

साहिबगंज के 22 वर्षीय रूपेश कुमार को लगभग 550 किलोमीटर दूर गुमला में परीक्षा केंद्र आवंटित किया गया था. उनका दावा है कि एडमिट कार्ड से संबंधित ईमेल उन्हें 19 जुलाई को दोपहर में मिला, जब तक परीक्षा शुरू हो चुकी थी. उन्होंने बताया कि यदि उन्हें पहले जानकारी मिल जाती तो उन्हें कम से कम दो दिन पहले यात्रा की तैयारी करनी पड़ती. उन्होंने झारखंड की परिवहन व्यवस्था और भारी बारिश को भी परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच पाने की वजह बताया.

हजारीबाग के 21 वर्षीय गणेश कुमार सोनकर को देवघर में परीक्षा केंद्र मिला था. उन्होंने कहा कि कम समय मिलने और आर्थिक कारणों की वजह से वे परीक्षा नहीं दे सके. उनका दावा है कि उन्हें एडमिट कार्ड से संबंधित कोई ईमेल प्राप्त ही नहीं हुआ. परिवार यात्रा के लिए तत्काल पैसे की व्यवस्था नहीं कर पाया और बारिश के कारण रेलवे स्टेशन तक पहुंचना भी मुश्किल था.

व्यवस्थागत विफलता.

सरकारी नौकरी की तैयारी कराने वाले ऑनलाइन कोचिंग प्लेटफॉर्म संचालक मयंक पटेल का कहना है कि दो वर्ष पुरानी भर्ती परीक्षा के लिए यह उम्मीद करना उचित नहीं है कि सभी उम्मीदवार लगातार आयोग की वेबसाइट देखते रहें. उनके अनुसार, सभी अभ्यर्थियों के पास स्मार्टफोन या ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा भी उपलब्ध नहीं होती.

उन्होंने कहा कि लगभग दो वर्षों के इंतजार के बाद आयोजित हुई परीक्षा में 75 प्रतिशत अभ्यर्थियों का शामिल नहीं होना भर्ती प्रक्रिया में एक गंभीर व्यवस्थागत विफलता की ओर इशारा करता है. उन्होंने एक गर्भवती महिला अभ्यर्थी का उदाहरण देते हुए कहा कि उसे दूसरे जिले में परीक्षा केंद्र मिलने के कारण वह भी परीक्षा नहीं दे सकी.

इस मामले पर झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता ने कहा कि परीक्षा से संबंधित सभी जानकारियां, सिटी इंटिमेशन स्लिप और एडमिट कार्ड आयोग की वेबसाइट पर समय से उपलब्ध करा दिए गए थे. उनके अनुसार, उम्मीदवार वेबसाइट से अपने दस्तावेज डाउनलोड कर सकते थे.

यह मामला एक बार फिर सरकारी भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और अभ्यर्थियों की सुविधा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है. लाखों युवाओं के लिए सरकारी नौकरी केवल रोजगार नहीं, बल्कि उनके भविष्य की उम्मीद होती है. ऐसे में भर्ती प्रक्रियाओं को अधिक संवेदनशील, पारदर्शी और अभ्यर्थी हितैषी बनाए जाने की आवश्यकता है. 

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