टीसीएस नासिक: 9 में से निदा खान का नाम सिर्फ एक एफआईआर में, लेकिन टीवी चैनलों ने ‘मास्टरमाइंड’ बताया
‘ऑल्ट न्यूज़’ में अंकिता महालनोबिश और शिंजिनी मजूमदार के अनुसार, नासिक के टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) बीपीओ मामले में दर्ज नौ एफआईआर (प्राथमिकी) में से केवल एक में निदा खान का नाम है, और वह भी कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के संबंध में. हालाँकि, इसके बाद मीडिया के कुछ वर्गों में जो कुछ भी दिखाया गया, उसका इस रिकॉर्ड से कोई मेल नहीं था. पिछले महीने आरोप सामने आने के बाद टीवी समाचार चैनलों पर जो कुछ प्रसारित किया गया और एफआईआर में जो दस्तावेज दर्ज हैं, उनके बीच जमीन-आसमान का अंतर है.
एफआईआर के परीक्षण से पता चलता है कि उनमें से कोई भी उन सनसनीखेज दावों का समर्थन नहीं करती है जो भारत के प्रमुख समाचार चैनलों पर प्राइम टाइम में प्रसारित किए गए थे. जहाँ केवल एक एफआईआर में निदा खान का नाम है और शिकायत हिंदू देवी-देवताओं के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी तक सीमित है, वहीं शिव अरूर, अर्णब गोस्वामी, अंजना ओम कश्यप और राहुल शिवशंकर सहित कई 'स्टार' एंकरों ने उन्हें तथाकथित "कॉर्पोरेट जिहाद" या "धर्मांतरण सिंडिकेट" की "मास्टरमाइंड" के रूप में चित्रित किया. उन पर आरोप लगाया गया कि वह हिंदू महिलाओं को निशाना बनाने और उनके धर्मांतरण की साजिश रच रही थीं. ये आरोप बिना किसी विश्वसनीय स्रोत के पेश किए गए और एफआईआर में इनका कोई उल्लेख नहीं है, जो कि इस मामले का आधार हैं.
विभिन्न चैनलों पर यह विमर्श (नरेटिव) अपुष्ट दावों की एक श्रृंखला पर बनाया गया था: जैसे भर्ती के दौरान महिलाओं को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाया गया, उनका ब्रेनवॉश किया गया और शोषण किया गया, और धमकी या ब्लैकमेल के तहत धर्मांतरण के लिए मजबूर किया गया. यह भी दावा किया गया कि खान ने अपनी एचआर भूमिका का कथित तौर पर उपयोग करते हुए इन शिकायतों को दबा दिया. इसके अतिरिक्त यह भी दावे किए गए कि उन्होंने कर्मचारियों को हिजाब या बुर्का पहनने या इस्लामी प्रथाओं का पालन करने का निर्देश दिया—इन दावों का एफआईआर में कोई आधार नहीं होने के बावजूद इन्हें व्यापक रूप से प्रसारित किया गया.
एफआईआर में वास्तव में क्या लिखा है?
नौ एफआईआर की समीक्षा से पता चलता है कि उनमें कुल मिलाकर आठ व्यक्तियों के नाम हैं. ये हैं: रजा मेमन, तौसीफ अत्तार, शाहरुख कुरैशी, दानिश शेख, शफी शेख, आसिफ अंसारी, निदा खान और अश्विनी चैनानी.
आरोप दखलअंदाजी वाले व्यक्तिगत सवाल पूछने से लेकर छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने तक के हैं. रजा मेमन और तौसीफ का नाम नौ में से पाँच एफआईआर में है; उन पर विरोध के बावजूद महिला सहयोगियों के साथ बार-बार अवांछित व्यवहार करने का आरोप है. एक मामले में, मेमन ने कथित तौर पर एक महिला कर्मचारी से उसकी मासिक धर्म संबंधी समस्याओं के बारे में पूछा. कई शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि इन दोनों ने इस्लाम की श्रेष्ठता का सुझाव देने वाली टिप्पणियाँ कीं और हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाया.
एक शिकायतकर्ता का आरोप है कि रमजान के दौरान उसे तौसीफ के घर पर टोपी पहनने के लिए मजबूर किया गया, नमाज पढ़ने के लिए विवश किया गया और शाकाहारी होने के बावजूद मांसाहारी भोजन खिलाया गया.
ऑपरेशनल हेड अश्विनी चैनानी का नाम कई एफआईआर में है; एक मामले में उन पर आरोपियों का साथ देने और शिकायतों पर कार्रवाई न करने का आरोप है. इसी तरह के आरोप सीनियर मैनेजर नितिन कपूर के खिलाफ भी लगाए गए हैं. दो एफआईआर में नामित आसिफ अंसारी पर घूरने से लेकर छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप हैं.

