बिहार में एक और पुल गिरा; भागलपुर में विक्रमशिला सेतु का हिस्सा गिरने से  यातायात रुका, बड़ा हादसा टला

बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु के पिलर नंबर 133 के पास सोमवार रात करीब 12:50 बजे पुल का एक हिस्सा ढह गया, जिसके बाद अधिकारियों ने पुल पर यातायात पूरी तरह से रोक दिया है.

अधिकारियों ने बताया कि वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और प्रशासनिक टीम की मुस्तैदी के कारण एक बड़ा हादसा टल गया.घटना के समय पुल पर कई छोटे-बड़े वाहन मौजूद थे, लेकिन सुरक्षा बलों ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए उन्हें पीछे हटाया और सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया.

‘पीटीआई और टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, हादसे की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी मौके पर पहुँचे और स्थिति का जायजा लिया. प्रशासन ने फिलहाल पुल पर वाहनों के आवागमन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है.

विपक्ष का हमला

बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सरकार को घेरते हुए लिखा कि उन्होंने एक महीने पहले ही चेतावनी दी थी कि ऐसी घटना हो सकती है. उन्होंने कहा कि आज की घटना यह दर्शाती है कि भ्रष्टाचार की सूची में बिहार शीर्ष पर क्यों है, जहाँ पिछले दो वर्षों में 100 से अधिक पुल और पुलिया ढह चुके हैं.

तेजस्वी यादव ने हिंदी में पोस्ट करते हुए लिखा: "और अब, भ्रष्ट एनडीए सरकार की कृपा से भागलपुर का विक्रमशिला सेतु गंगा मैया में समाधि ले चुका है. क्या भ्रष्टाचार के इससे और प्रत्यक्ष प्रमाण की आवश्यकता है? जिस वक्त पुल गिरा, उस समय उस पर कई गाड़ियाँ थीं, लेकिन ईश्वर की कृपा रही कि वे गिरते हुए स्लैब पर नहीं थे, जिससे जान-माल का नुकसान नहीं हुआ."

पिछले कुछ सालों में बिहार में पुलों और सेतु गिरने की और भी घटनाएं हुई हैं. इसी साल मार्च में गोपालगंज में घोघारी नदी का निर्माणाधीन पुल ढह गया था. अधिकारियों ने खराब पर्यवेक्षण और गुणवत्ता प्रबंधन में कमी को इसका कारण बताया था. मार्च 2024 में कोसी नदी पर बन रहे भारत के सबसे लंबे निर्माणाधीन पुल का एक हिस्सा गिर गया था, जिसमें एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी और 10 अन्य घायल हो गए थे. जून-जुलाई 2024 में भारी बारिश और संरचनात्मक विफलताओं के कारण विभिन्न जिलों सीवान, सारण, मधुबनी, अररिया और किशनगंज में 17 दिनों के भीतर लगातार 12 पुल गिर गए थे और सरकार ने कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की थी. इसके पहले जून 2023 में अगुआनी-सुल्तानगंज में 1710 करोड़ रुपये की लागत से गंगा नदी पर बन रहा यह विशाल पुल निर्माण के दौरान 14 महीनों में दूसरी बार गिर गया था (पहली बार अप्रैल 2022 में गिरा था). जुलाई 2020 सत्तरघाट पुल, गोपालगंज मुख्यमंत्री द्वारा उद्घाटन किए जाने के मात्र 29 दिन बाद ही पुल और उसकी पहुँच सड़क का एक हिस्सा ढह गया.  

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