ममता का छेड़छाड़ का आरोप: मतदान और गिनती के बीच, स्ट्रॉन्ग रूम में कैसे रखी जाती हैं ईवीएम
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मतदान खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईवीएम की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि मतगणना से पहले स्ट्रॉन्ग रूम में रखी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की जा रही है.
बुधवार को मतदान समाप्त होने के बाद गुरुवार रात ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और भाजपा पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि 4 मई को होने वाली मतगणना तक ईवीएम सुरक्षित नहीं हैं. इस आशंका के बीच वह कोलकाता के एक स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर देर रात तक मौजूद रहीं. साथ ही, उन्होंने अपनी पार्टी के सभी उम्मीदवारों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्ट्रॉन्ग रूम और मतगणना केंद्रों की निगरानी करें.
हालांकि, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने इन आरोपों को खारिज किया. चुनाव आयोग के अनुसार, टीएमसी द्वारा साझा किया गया वीडियो गलत तरीके से पेश किया गया. आयोग ने स्पष्ट किया कि वह वीडियो पोस्टल बैलेट के पृथक्करण की नियमित प्रक्रिया का था, जिसे सभी उम्मीदवारों को सूचित करके किया गया था. टीएमसी ने आरोप लगाया था कि अधिकारियों और भाजपा प्रतिनिधियों द्वारा डाक मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है, लेकिन आयोग ने इसे निराधार बताया.
प्रक्रिया क्या कहती है
चुनाव आयोग की ‘इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन मैनुअल, 2023’ के अनुसार, ईवीएम के रखरखाव और सुरक्षा के लिए सख्त नियम तय हैं. चुनाव से पहले ईवीएम जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) के नियंत्रण में सुरक्षित गोदामों में रखी जाती हैं. चुनाव प्रक्रिया शुरू होने पर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ईवीएम का रैंडमाइजेशन किया जाता है और उन्हें संबंधित विधानसभा क्षेत्रों के स्ट्रॉन्ग रूम में भेजा जाता है.
मतदान के दिन वोटिंग खत्म होने के बाद ईवीएम को सील किया जाता है और सुरक्षा के बीच स्ट्रॉन्ग रूम में वापस लाया जाता है. आमतौर पर उम्मीदवारों और उनके एजेंटों को इस प्रक्रिया में शामिल रहने की अनुमति होती है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे. सभी उपयोग की गई ईवीएम को एक अलग स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है, जबकि अप्रयुक्त मशीनों को ‘रिजर्व ईवीएम’ के रूप में दूसरे कमरे में रखा जाता है.
स्ट्रॉन्ग रूम के लिए भी सख्त सुरक्षा प्रावधान हैं. इसमें केवल एक प्रवेश द्वार होता है, जबकि अन्य सभी रास्तों को बंद कर दिया जाता है. दरवाजे पर डबल लॉक सिस्टम होता है, जिसकी चाबियां अलग-अलग अधिकारियों के पास रहती हैं. यहां 24 घंटे सशस्त्र सुरक्षा बल तैनात रहते हैं और पूरे परिसर की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से की जाती है, जिनमें निर्बाध बिजली आपूर्ति की व्यवस्था होती है.
इसके अलावा, स्ट्रॉन्ग रूम खोलने और बंद करने की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाती है और हर गतिविधि का रिकॉर्ड लॉग बुक में दर्ज होता है. उम्मीदवारों को पहले से सूचना देकर उन्हें अपने प्रतिनिधि तैनात करने का मौका दिया जाता है. रिटर्निंग ऑफिसर नियमित रूप से निरीक्षण कर रिपोर्ट जिला निर्वाचन अधिकारी को भेजते हैं.
मतगणना के दिन भी ईवीएम को स्ट्रॉन्ग रूम से काउंटिंग सेंटर तक कड़ी सुरक्षा और निगरानी में ले जाया जाता है. पूरी प्रक्रिया में उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाता है ताकि किसी भी तरह की शंका न रहे.
इसी तरह, पोस्टल बैलेट के लिए भी अलग प्रोटोकॉल तय हैं. इन्हें अलग लिफाफों में सुरक्षित रखकर विशेष स्ट्रॉन्ग रूम में संग्रहित किया जाता है और उनकी प्रक्रिया भी पारदर्शिता के साथ पूरी की जाती है.
कुल मिलाकर, चुनाव आयोग का कहना है कि ईवीएम और पोस्टल बैलेट की सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय और पारदर्शी व्यवस्था लागू है. इसके बावजूद, चुनावी माहौल में आरोप-प्रत्यारोप जारी रहते हैं, जिससे राजनीतिक तनाव बढ़ता है.

