डीप डाइव विद श्रवण गर्ग | ममता की हार का मतलब देश के लिए क्या होगा?
पश्चिम बंगाल का 2026 का विधानसभा चुनाव अब सिर्फ एक राज्य की सत्ता का संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे देश की राजनीति और लोकतंत्र की दिशा तय करने वाला एक निर्णायक ‘कुरुक्षेत्र’ बन चुका है. ‘हरकारा डीप डाइव’ पर ऑडियो पॉडकास्ट में में, वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने इस चुनाव के उन अनछुए पहलुओं पर रोशनी डाली, जो इसे आज़ाद भारत के सबसे जटिल और अभूतपूर्व चुनावों में से एक बनाते हैं.
‘तृणमूल के गुंडों’ पर सीआरपीएफ की कार्रवाई? बांग्लादेश का पुराना वीडियो गलत दावे के साथ वायरल
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से जोड़कर सोशल मीडिया में एक वीडियो शेयर किया जा रहा है. इसमें मोटरसाइकिल पर सवार दो व्यक्ति नीचे उतरकर एक दरवाज़े पर कुल्हाड़ी से हमला करते नज़र आ रहे हैं. थोड़ी ही देर बाद सुरक्षाकर्मी द्वारा इन्हें हिरासत में ले लिया जाता है. यूज़र्स इस वीडियो को शेयर करते हुए दावा कर रहे है कि टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) के दो गुंडे बाइक पर सवार होकर मतदाताओं को डराने आए थे, जिन्हें चुनाव के दौरान तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने रोक दिया और तुरंत गिरफ़्तार कर लिया.
एक अलग आवाज़: बंगाल बोल रहा है, भारत को सुनना चाहिए
‘द टेलीग्राफ’ में मनोज झा ने अंग्रेजी में लिखा है कि, 2026 की शुरुआत तक, भारतीय जनता पार्टी सीधे तौर पर 15 भारतीय राज्यों में शासन कर रही है, जबकि उसका राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) 28 में से 19 राज्यों की सरकारों को नियंत्रित करता है और लोकसभा की 293 सीटों पर काबिज है, जो सदन का 54% है. स्वतंत्रता के शुरुआती दशकों में कांग्रेस के प्रभुत्व के बाद से किसी भी राजनीतिक दल ने भारत के संघीय परिदृश्य के इतने बड़े हिस्से पर एक साथ नियंत्रण नहीं किया है. अपने मूल में, बंगाल इस बात की परीक्षा ले रहा है कि क्या एक मजबूत क्षेत्रीय दल के नेतृत्व वाला गर्वित प्रगतिशील राज्य भाजपा के निरंतर विस्तार का सामना कर सकता है, और क्या भारत के संघीय लोकतंत्र में अब भी कोई सार्थक बहुलता बची है.

