हेट स्पीच: अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 2020 में दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान कथित नफरत भरे भाषणों (हेट स्पीच) के लिए भाजपा नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है.

जहाँ भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं, वहीं वर्मा दिल्ली सरकार में मंत्री हैं. नफरत भरे भाषणों से संबंधित याचिकाओं के एक समूह पर 29 अप्रैल को दिए गए अपने फैसले में, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने माकपा नेताओं बृंदा करात और के.एम. तिवारी द्वारा दायर उस याचिका पर भी सुनवाई की, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के जून 2022 के फैसले को चुनौती दी गई थी.

‘पीटीआई’ के अनुसार, अपने फैसले में, शीर्ष अदालत ने नोट किया कि हाईकोर्ट ने स्वतंत्र मूल्यांकन के आधार पर यह माना था कि इन भाषणों से किसी संज्ञेय अपराध के होने का पता नहीं चलता. अदालत ने यह भी कहा कि ये बयान किसी विशिष्ट समुदाय के खिलाफ निर्देशित नहीं थे और न ही इनसे हिंसा या सार्वजनिक अव्यवस्था फैली.

ठाकुर ने “गद्दारों को गोली मारने” का नारा लगाया था

उल्लेखनीय है कि तत्कालीन वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर को चुनाव आयोग द्वारा तब फटकार लगाई गई थी, जब उन्होंने एक चुनावी रैली में भीड़ को "गद्दारों को गोली मारने" के नारे लगाने के लिए उकसाया था. वह शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बोल रहे थे.

प्रवेश वर्मा ने कसम खाई थी कि भाजपा की जीत के कुछ ही घंटों के भीतर प्रदर्शनकारियों को "वापस भेज दिया जाएगा." उन्होंने आगे कहा था कि अगर इन्हें बेरोकटोक छोड़ दिया गया, तो वे "बलात्कार और हत्या" करेंगे.

 

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