$10 अरब के निवेश के वादे के बाद ट्रंप प्रशासन ने अडानी के खिलाफ दीवानी और आपराधिक मामले खत्म किए

भारत के गौतम अडानी समूह के लिए आज सोमवार (18 मई 2026) को अमेरिका दो अच्छी खबरें आईं. एक तो, ट्रंप प्रशासन ने भारतीय अरबपति गौतम अडानी के खिलाफ आपराधिक धोखाधड़ी के आरोपों को खारिज करने के लिए कदम उठाया, और इसके साथ ही उनकी एक कंपनी से जुड़े ईरान प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन के मामले को भी सुलझा लिया.

मामले से वाकिफ एक सूत्र के मुताबिक, दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक के खिलाफ लंबित मामलों का यह समाधान अडानी के वकील — जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी वकील भी हैं — द्वारा पिछले महीने यह कहे जाने के बाद आया है कि उनके मुवक्किल (क्लाइंट) संयुक्त राज्य अमेरिका में 10 अरब डॉलर का निवेश करना चाहते थे, लेकिन इन मामलों के चलते ऐसा नहीं कर पा रहे थे. ‘रॉयटर्स’ के अनुसार, यह ट्रंप के न्याय विभाग (जस्टिस डिपार्टमेंट) द्वारा अपने डेमोक्रेटिक पूर्ववर्ती जो बाइडेन के कार्यकाल के दौरान लाए गए एक हाई-प्रोफाइल मामले को छोड़ने का सबसे नया उदाहरण है.

फोर्ब्स पत्रिका के अनुसार, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी सहयोगी अडानी की अनुमानित संपत्ति 82 अरब डॉलर है.

अडानी पर आरोप था कि उन्होंने भारतीय सरकारी अधिकारियों को 26.5 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने पर सहमति जताई थी ताकि अडानी समूह को भारत का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र (सोलर पावर प्लांट) विकसित करने की मंजूरी मिल सके. अभियोजकों (प्रोसीक्यूटर्स) का कहना था कि उन्होंने और उनके कथित सह-साजिशकर्ताओं ने कर्जदाताओं और निवेशकों से अपने इस भ्रष्टाचार को छिपाकर 3 अरब डॉलर से अधिक की रकम जुटाई थी. अडानी समूह शुरू से ही इन गड़बड़ियों से इनकार करता रहा है. अडानी इस कंपनी के संस्थापक और चेयरमैन हैं.

पिछले हफ्ते अदालती दस्तावेजों से यह भी सामने आया था कि अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (एसईसी) ने भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने की कथित योजना को लेकर अडानी के खिलाफ एक दीवानी (सिविल) मुकदमे को अलग से सुलझा लिया है, हालांकि इस कदम को अभी अदालत की मंजूरी मिलना बाकी है.

 



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