10 नागरिक, अराजकता की 10 कहानियाँ: कैसे एसआईआर के माध्यम से वंचित मतदाताओं को बाहर किया जा रहा है

अंतरा बरुआ की यह विस्तृत रिपोर्ट कहती है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और इससे नागरिकों के लिए पैदा हुई समस्याओं की बाढ़ हर कोने में दिखाई दे रही है. इस प्रक्रिया ने जाति, वर्ग और धर्म की दीवारों से परे लोगों को प्रभावित किया है. फिर भी, यह मुख्य रूप से विशेषाधिकार प्राप्त लोग ही हैं जो दस्तावेज़ जुटाने की इस अराजकता और भ्रम की स्थिति का सामना करने में सक्षम हैं.

'द वायर' के लिए अंतरा ने दिल्ली के ऐसे ही 10 मतदाताओं और एसआईआर से निपटने के उनके संघर्ष पर एक नज़र डाली है:

1. अनिल कुमार: मैपिंग नोटिस 30 वर्षीय अनिल कुमार बेरोजगार हैं. वह सराय काले खां के एक रैन बसेरे में रहते हैं, जहाँ उनका जन्म और पालन-पोषण हुआ. उनका वोट जंगपुरा विधानसभा क्षेत्र में आता है. अनिल अनपढ़ हैं और उन्हें नहीं पता कि उनसे कौन से दस्तावेज़ मांगे जा रहे हैं. उनकी माँ के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है, लेकिन उन्होंने पहले वोट दिया है. अनिल ने भी कई चुनावों में वोट डाला है. दोनों बार स्कूल में वोट देने के बावजूद उनका नाम कट गया है और उन्हें अधिकारियों द्वारा भगा दिया गया.

2. अमन: नाम हटाया गया 28 वर्षीय अमन ने अपने परिवार और पड़ोसियों के फॉर्म भरे थे. वह पिछले 12 वर्षों से तुगलकाबाद गाँव के वाल्मीकि मोहल्ले में रह रहे हैं. तुगलकाबाद में शहर में सबसे अधिक नाम हटाए जाने की दर दर्ज की गई है, जहाँ लगभग दो में से एक मतदाता ड्राफ्ट सूची में जगह नहीं बना पाया है. अमन के पास स्कूल प्रमाणपत्र, संपत्ति के कागजात, आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे सभी दस्तावेज़ मौजूद हैं, फिर भी उनका नाम हटा दिया गया है.

3. बिमला देवी: 2025 में नाम हटाया गया 66 वर्षीय बिमला देवी जब 2025 के दिल्ली चुनाव में वोट डालने गईं, तो पाया कि उनका नाम मतदाता सूची में नहीं था. वह पिछले 20 वर्षों से वाल्मीकि मोहल्ले में रह रही हैं. घरेलू कामगार बिमला के पास आधार कार्ड, वोटर आईडी, बिजली बिल और राशन कार्ड सहित सभी कागजात बेहद व्यवस्थित हैं.  बीएलओ ने उनसे कहा कि जिन लोगों के नाम पहले ही हटाए जा चुके हैं, उन्हें बाद में देखा जाएगा.

4. कुन्ने लाल: नाम हटाया गया, मृत घोषित लाल गुंबद बस्ती के निवासी कुन्ने लाल को एसआईआर में पूरी तरह से जीवित और स्वस्थ होने के बावजूद मृत घोषित कर दिया गया. 2002 से कई बार वोट डाल चुके और पिछले चुनाव में भी मतदान करने वाले कुन्ने लाल को यह बात 'वोटर अधिकार मंच' के एक सर्वेक्षण के बाद पता चली.

5. रुखसाना: नाम हटाया गया 22 वर्षीय रुखसाना बेला एस्टेट की निवासी हैं, जो यमुना के डूब क्षेत्र (फ्लडप्लेन) में गीता फ्लाई-ओवर के नीचे एक झुग्गी बस्ती है. 729 लोगों की इस बस्ती में केवल एक व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट रोल में आया है, और रुखसाना का नाम उसमें नहीं है. अधिकारियों का कहना है कि यह बुलडोज़र कार्रवाई से प्रभावित क्षेत्र है, इसलिए नाम हटाए गए हैं. हालांकि, रुखसाना के पास उनका पता और वोटर आईडी की कॉपी है.

6. कुमित्रा देवी: नाम हटाया गय  कुमित्रा देवी 40 साल से बेला एस्टेट में रह रही हैं और उन्होंने अपने पति के मृत्यु प्रमाण पत्र सहित सभी दस्तावेज़ संभाल कर रखे हैं. चुनाव के समय "जहाँ झुग्गी वहाँ मकान" का वादा करने वाले नेताओं के बाद अब उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. 40 साल से वोट दे रहीं कुमित्रा का नाम भी सूची से गायब है.

7. प्रियंका पुंडीर: नोटिस बेला एस्टेट की एक अन्य बस्ती में रहने वाली प्रियंका पुंडीर का घर कुछ हफ्ते पहले ही ध्वस्त कर दिया गया था. 1900 के दशक के भूमि कर कागजात होने के बावजूद, उन्हें नोटिस मिला है और उनका नाम एसआईआर में हटा दिया गया है. अधिकारियों ने केवल इतना कहा कि उनका फॉर्म "गलत" था.

8. रेबेका जॉन: नोटिस वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन 1990 के दशक से दिल्ली की मतदाता हैं. बीएलओ को 2002 की सूची में अपना नाम दिखाने के बावजूद, उन्हें नाम में अंतर (शादी के बाद पति का सरनेम जोड़ने) का हवाला देते हुए नोटिस दिया गया. इसके कारण उनके बेटे को भी नोटिस मिला है.

9. निलंजन मुखोपाध्याय: नोटिस वरिष्ठ पत्रकार और लेखक निलंजन मुखोपाध्याय का नाम 2002 की मतदाता सूची में नहीं है. जब बीएलओ उनके पास आईं, तो उन्होंने आधार कार्ड, संपत्ति के कागजात और पैन कार्ड दिखाए. मुखोपाध्याय के अनुसार, एक हिंदू मतदाता होने के नाते उन्हें जांच की एक कम परत का सामना करना पड़ा, जो प्रक्रिया में असमानता को स्पष्ट करता है.

10. दलीप सिंह: नोटिस नेहरू कैंप झुग्गी-झोपड़ी क्लस्टर में रहने वाले और पंप मरम्मत की दुकान चलाने वाले दलीप सिंह से उनके पिता का जन्म प्रमाण पत्र माँगा जा रहा है, जो उनके पास नहीं है. उनके माता-पिता का देहांत हो चुका है. एसआईआर के इस तर्क से वह बेहद हैरान और परेशान हैं.

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