14 साल का अश्वमित, 24 लाख फॉलोअर और सत्ता की नज़र में
‘नॉइए त्सुर्खर त्साइटुंग’ के मुताबिक, लखनऊ के एक दलित किशोर ने इंस्टाग्राम को अपना अखबार बना लिया है. 14 साल के अश्वमित गौतम मोदी सरकार, हिंदू राष्ट्रवाद, जातिभेद और भ्रष्टाचार पर बेबाक वीडियो बनाते हैं. 24 लाख लोग उन्हें फॉलो करते हैं और कई वीडियो एक करोड़ से ज़्यादा बार देखे जा चुके हैं. स्विस अखबार नॉइए त्सुर्खर त्साइटुंग के लिए अहमर ख़ान ने लखनऊ जाकर उनसे मुलाक़ात की.
अश्वमित का नाम पहले अश्वमित शर्मा था. उनके पिता जो पेशे से माली हैं ने स्कूल में दाखिले के वक्त जातिसूचक असली उपनाम छुपाया था. बाद में अश्वमित ने खुद 'गौतम' अपनाया दलित पहचान की स्वीकृति के रूप में. मां और बहन दिल्ली में रहती हैं. वे और बड़े भाई आदित्य लखनऊ के एक छोटे नीले मकान में दादी के साथ रहते हैं. घर पर अक्सर बिजली नहीं होती, इसलिए दोनों भाई रात दस बजे घर से तीन किलोमीटर दूर एक 24 घंटे खुली रहने वाली लाइब्रेरी में चले जाते हैं. आदित्य वहां कानून की पढ़ाई करते हैं, अश्वमित अखबार पढ़ते हैं, स्क्रिप्ट लिखते हैं, वीडियो एडिट करते हैं. देर हो जाए तो दोनों वहीं फर्श पर सो जाते हैं.
उनके टूटे-फूटे अलमारी में प्रेमचंद और नीत्शे, भगत सिंह और भारतीय संविधान, रवीश कुमार और रामचंद्र गुहा सब एक साथ रखे हैं. ज़्यादातर किताबें मेट्रो स्टेशनों पर सेकंडहैंड खरीदी हैं या दोस्तों से उधार ली हैं. तीन साल में करीब 400 किताबें पढ़ चुके हैं. 90 फीसद हिंदी में. इन दिनों ऐनी फ्रैंक की डायरी पढ़ रहे हैं. वे कहते हैं "जब मैंने 400 किताबें पढ़ी हैं, तो मैं 400 लेखकों की ज़िंदगी जी चुका हूं."
शुरुआत में उनके वीडियो साधारण थे. शहर का इतिहास, किताबें, पेड़-पौधे. पहले हकलाते थे, यूट्यूब ट्यूटोरियल से ठीक किया. होठों के बीच पेंसिल रखकर मुश्किल शब्दों का अभ्यास किया रोज़, महीनों तक. दो साल तक वीडियो डाले, कोई खास नहीं देखता था. राजनीति में आना धीरे-धीरे हुआ दर्शकों ने पूछा कि सामाजिक मुद्दों पर क्यों नहीं बोलते. उन्होंने पहला राजनीतिक वीडियो पड़ोस के एक ढहे हुए सरकारी पानी के टैंक पर बनाया घटिया निर्माण सामग्री, कई लोग ज़ख्मी. उन्होंने इसे भ्रष्टाचार का उदाहरण बताया. लोग जुड़ने लगे.
2026 की शुरुआत में पुलिस लाइब्रेरी में आई और उन्हें उठा ले गई. एक वीडियो पर शिकायत दर्ज हुई थी जिसमें उन्होंने एक लोकगायिका की गिरफ्तारी का विरोध किया था उस पर हिंदू देवी के अपमान का आरोप था. अश्वमित ने कहा था कि सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए. बात को समझाने के लिए उन्होंने इंटरनेट से एक तस्वीर लगाई जिसमें भगवान राम का चेहरा कार्टून डोरेमोन का था. पुलिस ने धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया. नाबालिग होने की वजह से वे जल्द छूट गए, लेकिन 24 साल के भाई आदित्य को एक दिन हिरासत में बिताना पड़ा. अश्वमित ने इस पर भी वीडियो बनाया. वे कहते हैं "अगर मेरी उम्र 18 से ज़्यादा होती, तो मेरा हाल सोनम वांगचुक या उमर ख़ालिद जैसा होता."
उनके पास पासपोर्ट नहीं है. नगर पालिका अपॉइंटमेंट नहीं देती. जब से उन्होंने प्रदूषित नदियों और टूटी सड़कों पर वीडियो में नगर प्रशासन को टैग करना शुरू किया है. वे ऑक्सफर्ड, कैम्ब्रिज या येल में पढ़ना चाहते हैं, प्रोफेसर बनना चाहते हैं, एक मीडिया प्लेटफॉर्म खड़ा करना चाहते हैं और फिर भारत लौटना चाहते हैं.
किसी ने एक बार कहा कि वे जो लड़ाई लड़ रहे हैं वह एक 14 साल के बच्चे के लिए बहुत बड़ी है. खेलना-कूदना क्यों नहीं करते. अश्वमित का जवाब था "बिरसा मुंडा ने 15 साल की उम्र में विद्रोह का आह्वान किया था. इसमें अलग क्या है?" फिर उन्होंने कैमरा उठाया और फिल्माते रहे.

