ई20 ईंधन को लेकर मारुति, टाटा और महिंद्रा ने भी उठाए थे सवाल, ई-मेल से चिंताओं का खुलासा
जब से देशभर में 20% एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (ई20) को अनिवार्य रूप से लागू किया गया है, तब से वाहनों में खराबी आने के मामले सामने आ रहे हैं. विशेषकर सोशल मीडिया में ई20 पेट्रोल से होने वाले नुकसान की व्यापक चर्चा है. अब पता चला है कि भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग की प्रमुख संस्था ‘एसआईएएम’ (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) ने भी 28 जुलाई को सरकार को एक शिकायत पत्र भेजकर ई20 ईंधन में संदूषण (मिलावट और अशुद्धि) की बात उठाई थी. लेकिन केंद्र सरकार ने जैसे हि ई20 ईंधन के सुरक्षित होने का आश्वासन दिया, इसके तुरंत बाद एसआईएएम ने अपना पत्र वापस ले लिया और कहा कि डेटा को और अधिक "प्रमाणीकरण" और जांच की आवश्यकता है.
‘रॉयटर्स’ द्वारा देखे गए आंतरिक ई-मेल और अप्रकाशित डेटा से यह खुलासा हुआ कि भारत के कार बाजार में 67% हिस्सेदारी रखने वाली तीन प्रमुख कंपनियों—मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा—ने आपस में इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई थी.
अदिति शाह और आदित्य कालरा के अनुसार, कार निर्माताओं ने 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पेट्रोल पंपों से 250 से अधिक ईंधन नमूने एकत्र कर परीक्षण किया था. 18 राज्यों के नमूनों में क्लोराइड की मात्रा सरकारी मानक 3 पीपीएम की तुलना में बेहद चिंताजनक पाई गई. राजस्थान (6-570 पीपीएम), दिल्ली (1.4-420 पीपीएम) और महाराष्ट्र (10-357 पीपीएम) में इसका स्तर बहुत अधिक दर्ज किया गया. आंध्र प्रदेश (13,000 पीपीएम) और उत्तर प्रदेश (12,500 पीपीएम) में नमी का स्तर सरकारी सीमा 3,000 पीपीएम से कई गुना अधिक मिला.
उद्योग विशेषज्ञों एवं अधिकारियों ने निजी संचार में यह स्पष्ट किया था क्लोराइड से पुर्जों में जंग लगती है, जबकि मारुति के अधिकारियों के अनुसार वर्तमान फ्यूल इंजेक्टर्स केवल 1 पीपीएम तक ही क्लोराइड सहन कर सकते हैं.
महिंद्रा के वरिष्ठ इंजीनियर के अनुसार ऑर्गेनिक क्लोराइड वाहनों के इंजन को महज 200 किमी के भीतर खराब कर सकता है और ईंधन भरवाने के तुरंत बाद वाहन ठप होने का मुख्य कारण यही है. अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंकों और पाइपलाइनों के खराब रखरखाव के कारण नमी ईंधन में मिल रही है, जिससे वाहन अचानक बंद हो जाते हैं.
हालांकि पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि तेल विपणन कंपनियों ने कड़ा परीक्षण किया है और मिलावट के केवल 4 मामले पाए गए हैं. सरकार का दावा है कि स्थिति पूरी तरह सामान्य है और घबराने की कोई बात नहीं है.
‘एसआईएएम’ ने पत्र वापसी का कारण नमूनों का छोटा आकार और डेटा का अनधिकृत/प्राथमिक होना बताया. महिंद्रा ने ई-मेल से निकाले गए निष्कर्षों को निराधार और गलत करार दिया, जबकि मारुति और टाटा ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की.

