नीट यूजी के बाद अब ‘पीजी’ की बारी: आधी रात को एसएमएस पर गलत परीक्षा-केंद्र भेजे, अभ्यर्थियों ने नड्डा पर गुस्सा निकाला

“बर्बाद गुलिस्तां करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी है, हर शाख पे उल्लू बैठे हैं अंजाम-ऐ-गुलिस्तां क्या होगा.” अभी नीट-यूजी पेपर लीक का मामला सुलटा भी नहीं है कि नीट-पीजी परीक्षा को लेकर बिगड़े तंत्र की एक और खबर आ गई. अर्नब चटर्जी की रिपोर्ट के अनुसार, मेडिकल परीक्षाओं का आयोजन करने वाली संस्था 'नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज' (एनबीईएमएस) ने नीट-पीजी 2026 के उम्मीदवारों को आधी रात को एसएमएस भेजकर गलत परीक्षा केंद्र आवंटित कर दिए. उदाहरण के लिए, गुजरात के अभ्यर्थी को मणिपुर, बंगाल के अभ्यर्थी को यूपी/बिहार और केरल के अभ्यर्थियों को छत्तीसगढ़ या मुंबई में केंद्र आवंटित कर दिए गए.

जब अभ्यर्थियों ने स्थिति की पुष्टि के लिए एनबीईएमएस पोर्टल पर लॉगिन करने का प्रयास किया, तो पोर्टल पर सही शहर प्रदर्शित हो रहा था, जबकि एसएमएस में दूर-दराज का राज्य लिखा था. इस अंतर्विरोध ने अभ्यर्थियों के बीच गहरा असमंजस पैदा कर दिया.

अचानक और सुदूर राज्यों में केंद्र मिलने की गलत सूचना से डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों में भारी घबराहट फैल गई. अभ्यर्थियों के लिए एक महीने के भीतर ट्रेनों में कन्फर्म टिकट पाना और होटल बुक करना बेहद कठिन एवं अत्यधिक खर्चीला साबित होता है. 24 घंटे की ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और तैयारी में जुटे छात्रों को इस प्रशासनिक लापरवाही के कारण भारी मानसिक प्रताड़ना सहनी पड़ी.

एनबीईएमएस ने बाद में एक अन्य एसएमएस जारी कर पहले संदेश को तकनीकी खराबी बताया और सही परीक्षा केंद्र की पुष्टि की (जैसे गाजियाबाद के स्थान पर कोलकाता). हालांकि, नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद पहले से ही आक्रोशित छात्रों का गुस्सा सोशल मीडिया पर फूट पड़ा.

सोशल मीडिया पर छात्रों ने बहुविकल्पीय प्रश्नों (एमसीक्यूस) और मीम्स के माध्यम से एनबीईएमएस के अधिकारियों पर तंज कसा. किसी ने इसे "अखिल भारतीय तीर्थयात्रा" बताया, तो किसी ने सरकार द्वारा समय से पहले "अप्रैल फूल्स डे" मनाना कहा. कई आवेदकों ने सवाल उठाए कि इस तरह की बड़ी गलती करने से पहले एनबीईएमएस के अधिकारियों ने किस श्रेणी की दवाओं का सेवन किया था.

एक आवेदक ने अपने एसएमएस का स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें उसका परीक्षा केंद्र छत्तीसगढ़ दिख रहा था, और कहा, "राजस्थान से छत्तीसगढ़ तक, धन्यवाद एनबीईएमएस. क्या मुझे दिल्ली आकर आपको गाली देनी चाहिए, या मैं यहीं से ऐसा करूँ तो ठीक रहेगा?" कुछ अभ्यर्थियों ने पाकिस्तान के कराची में परीक्षा केंद्र आवंटित होने के स्क्रीनशॉट साझा कर इसे 'धुरंधर-शैली का प्लॉट' करार दिया.

केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के हटने के बाद, यह मामला सीधे केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा के दायरे में आ गया, क्योंकि एनबीईएमएस स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है. सोशल मीडिया पर मंत्री नड्डा की अक्षमता पर सवाल उठाए गए और उनके इस्तीफे की मांग की गई.

बहरहाल, इस घटना ने भारत में सरकारी परीक्षा पोर्टलों के सुस्त डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, खराब यूजर इंटरफेस और ऐन मौके पर सर्वर के अत्यधिक धीमे होने जैसी गंभीर खामियों को भी उजागर किया. यह प्रकरण केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं था, बल्कि इसने भारत की संपूर्ण प्रवेश परीक्षा प्रणाली, उसके लॉजिस्टिक्स और डेटा प्रबंधन पर अभ्यर्थियों के विश्वास को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है.

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